मोतिहारी: युवाओं के बीच पहुंचकर उनके सवालों का जवाब देने का दावा करने वाली भाजपा के युवा संवाद कार्यक्रम में उस वक्त असहज स्थिति पैदा हो गई, जब एक छात्रा ने भाजपा के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता अखिलेश सिंह से सवाल पूछ लिया। आरोप है कि छात्रा के सवाल का स्पष्ट जवाब देने के बजाय नेता जी ने कह दिया कि ऐसे सवालों का जवाब नहीं दिया जा सकता। छात्रा जवाब की उम्मीद में इंतजार करती रही, लेकिन उसे संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। अब इस घटनाक्रम को लेकर सवाल उठ रहा है कि जब नेताओं के पास युवाओं के सवालों का जवाब नहीं है, तो फिर संवाद का आयोजन किस मकसद से किया जा रहा है?
सवालों के लिए बुलाया या सिर्फ अपनी बात सुनाने के लिए?
मोतिहारी के बीएड शिक्षण संस्थान में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत युवा संवाद प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम आयोजित किया गया था। दावा था कि देश में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों और राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर युवाओं के मन में उठ रहे सवालों का जवाब दिया जाएगा।
कार्यक्रम में बिहार भाजपा के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता अखिलेश सिंह, एमएस कॉलेज के पूर्व प्रधानाध्यापक अरुण पांडेय, उद्योगपति सह युवा भाजपा नेता यमुना शिकारिया सहित शिक्षक और छात्र-छात्राएं मौजूद थे। दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। मंच से युवाओं से संवाद की बात कही गई, लेकिन एक छात्रा के सवाल के बाद कार्यक्रम का माहौल ही बदल गया।
छात्रा सवाल पर सवाल करती रही, नेता जी जवाब देने के बजाय मंच से उतर गए!
कार्यक्रम के दौरान कई छात्राओं ने सवाल पूछे और अखिलेश सिंह जवाब दे रहे थे। इसी बीच एक छात्रा ने ऐसा सवाल किया, जिस पर आरोप के मुताबिक नेता जी स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि ऐसे सवालों का जवाब नहीं दिया जा सकता।
छात्रा अपने सवाल का जवाब पाने की कोशिश करती रही। मीडिया की ओर से भी हस्तक्षेप हुआ, लेकिन आरोप है कि बात का सीधा जवाब देने के बजाय अखिलेश सिंह माइक लेकर मंच से नीचे उतर गए और मीडिया से बातचीत करने लगे। दूसरी ओर छात्राएं जवाब का इंतजार करती रहीं।
क्या सवाल पूछना भी अब असहज करने वाली बात हो गई?
युवा संवाद का मतलब सिर्फ युवाओं को भाषण सुनाना नहीं, बल्कि उनकी बात सुनना और उनके सवालों का जवाब देना भी है। अगर किसी छात्रा का सवाल असुविधाजनक है, तो उसका जवाब तथ्यों और तर्कों के साथ दिया जा सकता है। सवाल से असहमति हो सकती है, लेकिन सवाल पूछने वाले को जवाब से वंचित छोड़ देना संवाद की भावना पर सवाल खड़ा करता है।
अखिलेश सिंह बिहार भाजपा के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता रह चुके हैं और किसान प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। ऐसे अनुभवी नेता से छात्र-छात्राएं जवाब की उम्मीद लेकर बैठी थीं। ऐसे में एक छात्रा के सवाल पर कथित तौर पर जवाब नहीं मिलना कार्यक्रम के आयोजकों के लिए भी असहज करने वाला घटनाक्रम बन गया।
अब भाजपा नेता से सीधे सवाल
क्या युवा संवाद में युवाओं को सवाल पूछने की पूरी आजादी थी? छात्रा के सवाल का जवाब क्यों नहीं दिया गया? क्या सवाल कार्यक्रम के विषय से बाहर था या उसका जवाब देना मुश्किल था? यदि संवाद का उद्देश्य युवाओं की शंकाएं दूर करना था, तो छात्रा को संतोषजनक जवाब क्यों नहीं मिला?
फिलहाल भाजपा नेता अखिलेश सिंह का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है। छात्रा ने वास्तव में क्या सवाल पूछा था और नेता जी ने उसका पूरा जवाब क्या दिया, यह संबंधित वीडियो और दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया से स्पष्ट होगा।
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