गया: जिस पवित्र बोधि वृक्ष के नीचे भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी, उसकी सेहत को लेकर राहत भरी खबर है। महाबोधि मंदिर परिसर में स्थित ऐतिहासिक बोधि वृक्ष पूरी तरह स्वस्थ है। इसकी पत्तियों में न तो किसी बीमारी के लक्षण मिले हैं और न ही किसी तरह के संक्रमण के संकेत। सोमवार को देहरादून स्थित वन अनुसंधान संस्थान (FRI) के वैज्ञानिकों की टीम ने वृक्ष का बारीकी से निरीक्षण किया। जांच के बाद विशेषज्ञों ने इसके स्वास्थ्य को संतोषजनक बताया और लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए नियमित देखभाल के कुछ सुझाव दिए।
देहरादून से पहुंचे वैज्ञानिकों ने की जांच
वन अनुसंधान संस्थान (FRI), देहरादून के वैज्ञानिक डॉ. संतन बर्थवाल और डॉ. शैलेश पांडे विशेष रूप से बोधगया पहुंचे थे। दोनों विशेषज्ञों ने महाबोधि मंदिर परिसर में स्थित पवित्र बोधि वृक्ष की पत्तियों और टहनियों का बारीकी से निरीक्षण किया। जांच के दौरान पेड़ की मौजूदा स्थिति और संभावित बीमारी या संक्रमण के लक्षणों का आकलन किया गया।
निरीक्षण के बाद डॉ. संतन बर्थवाल ने बताया कि बोधि वृक्ष पूरी तरह स्वस्थ है। इसकी पत्तियों पर किसी प्रकार की बीमारी या संक्रमण के लक्षण नहीं मिले हैं। फिलहाल वृक्ष के स्वास्थ्य को लेकर चिंता की कोई बात नहीं है।
सूखी टहनियों की छंटाई और जैविक कीटनाशक के छिड़काव की सलाह
वैज्ञानिकों ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण और पुराने वृक्ष को लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखने के लिए नियमित देखभाल जरूरी है। इसके लिए सूखी टहनियों की समय-समय पर छंटाई करने और जैविक कीटनाशक का छिड़काव करने की सलाह दी गई। विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे पेड़ को कीटों से होने वाले संभावित नुकसान से बचाने और उसकी सेहत बनाए रखने में मदद मिलेगी।
इस दौरान महाबोधि मंदिर के मुख्य भिक्षु भिक्खु चलिंदा और बोधि वृक्ष की देखभाल करने वाले भिक्षु भिक्खु दीनानंद भी मौजूद रहे।
आस्था के साथ जुड़ी है दुनिया भर के बौद्ध श्रद्धालुओं की भावनाएं
महाबोधि मंदिर का पवित्र बोधि वृक्ष केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि दुनिया भर के बौद्ध धर्मावलंबियों की आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी वृक्ष के नीचे भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। यही वजह है कि हर साल भारत सहित थाईलैंड, म्यांमार, श्रीलंका, वियतनाम, भूटान और अन्य देशों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। श्रद्धालु बोधि वृक्ष के दर्शन कर पूजा-अर्चना और ध्यान-साधना करते हैं।
ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखने की पहल
बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति की ओर से वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून के सहयोग से बोधि वृक्ष की नियमित जांच और देखभाल कराई जाती है। इसका उद्देश्य इस ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर को बीमारियों और संभावित नुकसान से बचाते हुए लंबे समय तक सुरक्षित रखना है। वैज्ञानिकों की ताजा जांच में वृक्ष का स्वस्थ पाया जाना श्रद्धालुओं और बोधगया के लिए राहत भरी खबर है।
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