जहानाबाद: सरकारी अभियान के नाम पर आयोजन करना और फिर उसकी सफलता के दावे करना आसान है, लेकिन जब कार्यक्रम में युवा ही नहीं पहुंचें तो पूरी तैयारी पर सवाल उठना लाजिमी है। जहानाबाद में नशामुक्त भारत अभियान के तहत आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश देने के लिए टाउन हॉल में कार्यक्रम सजाया गया, पटना से तीन नामचीन मनोचिकित्सकों को बुलाया गया, मंच तैयार हुआ और भाषण भी हुए, लेकिन जिन युवाओं के लिए पूरा आयोजन किया गया था, उनके बैठने वाली कुर्सियां खाली रह गईं। इस बदइंतजामी को देखकर जिलाधिकारी छिरिंग वाई भूटिया भी नाराज हो गईं। उन्होंने मंच से ही संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाते हुए आयोजन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए।
सबसे बड़ा सवाल यही था कि जब कार्यक्रम का मकसद युवाओं को जागरूक करना था, तो उन्हें कार्यक्रम तक लाने की तैयारी क्यों नहीं की गई? क्या आयोजन से पहले स्कूलों, कॉलेजों और युवा समूहों तक इसकी सूचना पहुंचाई गई थी? क्या आने-जाने की व्यवस्था पर ध्यान दिया गया था? टाउन हॉल की खाली कुर्सियां इन सवालों को और गंभीर बना रही थीं।
विशेषज्ञ बुलाए गए, लेकिन युवाओं तक पहुंचाने में प्रशासन पीछे
कार्यक्रम में पटना से तीन जाने-माने मनोचिकित्सकों को आमंत्रित किया गया था। उनका उद्देश्य युवाओं से सीधा संवाद कर मानसिक तनाव, अवसाद और नशे की लत से बचाव के उपाय बताना था। विशेषज्ञों ने युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और सकारात्मक जीवनशैली पर चर्चा की। मौजूद युवाओं ने सवाल भी पूछे, लेकिन अपेक्षित भागीदारी नहीं होने से कार्यक्रम का दायरा सीमित रह गया। विशेषज्ञों की मौजूदगी के बावजूद युवाओं की कम संख्या ने आयोजन की तैयारी और प्रचार-प्रसार की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए।
खाली कुर्सियां देख डीएम ने अधिकारियों को सुनाई खरी-खरी
कार्यक्रम में पहुंचीं जिलाधिकारी छिरिंग वाई भूटिया ने युवाओं की कम मौजूदगी पर नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से सवाल किया कि जब पूरा आयोजन युवाओं के लिए था, तो फिर उनकी भागीदारी इतनी कम क्यों रही? डीएम ने कहा कि यदि बेहतर प्रचार-प्रसार किया गया होता और युवाओं के आने-जाने के लिए वाहनों की व्यवस्था की गई होती, तो टाउन हॉल खाली नहीं रहता।
डीएम की नाराजगी ने आयोजन से जुड़े अधिकारियों की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। सरकारी कार्यक्रमों में केवल मंच, माइक और अतिथियों की व्यवस्था कर देना ही पर्याप्त नहीं है। जिस वर्ग के लिए कार्यक्रम हो, उसकी भागीदारी सुनिश्चित करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।
कागजों से निकलकर जमीन पर उतरे सरकारी अभियान
जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि नशामुक्त भारत अभियान को केवल औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा जाए। स्कूलों, कॉलेजों और मोहल्लों तक पहुंचकर युवाओं को जागरूक किया जाए। प्रचार-प्रसार की व्यवस्था मजबूत हो और आने वाले कार्यक्रमों में युवाओं की वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
जहानाबाद के इस आयोजन ने जिला प्रशासन की कार्यशैली के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। नशे जैसी गंभीर सामाजिक समस्या से युवाओं को बचाने के लिए अभियान चलाना जरूरी है, लेकिन सवाल यह है कि जब युवाओं तक कार्यक्रम की जानकारी और पहुंच सुनिश्चित नहीं होगी, तो जागरूकता का संदेश उन तक कैसे पहुंचेगा? खाली कुर्सियां सिर्फ कम उपस्थिति का दृश्य नहीं थीं, बल्कि आयोजन की तैयारियों की समीक्षा करने का संकेत भी थीं।
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