कटिहार: जिस बेटी को कभी गोद में खिलाकर बड़ा किया, जिसकी हंसी से घर-आंगन गुलजार रहता था, उसी बेटी को परिवार ने जीते-जी मृत मान लिया। वजह बनी उसकी अपनी पसंद से की गई शादी। दूसरी जाति के युवक से प्रेम विवाह करने पर पिता और भाई की नाराजगी इस कदर बढ़ी कि उन्होंने बेटी का जीवित रहते ही श्राद्ध कर्म कर दिया। परिवार की ओर से उससे सभी रिश्ते खत्म करने की बात भी कही गई है। इस घटना की चर्चा कटिहार जिले के कदवा थाना क्षेत्र के निझरा गांव में हो रही है।
प्रेम विवाह के बाद परिवार से टूटा रिश्ता
जानकारी के अनुसार, निझरा गांव निवासी श्याम ठाकुर की बेटी ने परिवार की मर्जी के खिलाफ पहलागढ़ गांव के रहने वाले अजय पासवान से शादी कर ली। अजय पासवान मुखिया प्रतिनिधि मुन्ना पासवान के पुत्र बताए जा रहे हैं। दोनों ने अपनी पसंद से विवाह किया, लेकिन अलग-अलग जातियों से होने के कारण यह रिश्ता लड़की के परिवार को स्वीकार नहीं हुआ।
बताया जा रहा है कि बेटी के इस फैसले से पिता और भाई काफी नाराज हो गए। परिवार ने शादी को स्वीकार करने और बेटी को नई जिंदगी के लिए शुभकामनाएं देने के बजाय उससे नाता तोड़ने का फैसला कर लिया।
बेटी जिंदा, लेकिन परिवार ने कर दिया श्राद्ध!
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पिता और भाई ने बेटी के जीवित रहते ही उसका श्राद्ध कर्म कर दिया। बताया जा रहा है कि परिवार ने भविष्य में उससे किसी तरह का संबंध नहीं रखने की बात भी कही है।
एक तरफ बेटी ने अपनी पसंद के युवक के साथ जीवन बिताने का फैसला किया, तो दूसरी तरफ परिवार ने उसे अपने जीवन से अलग करने का रास्ता चुना। जिस घर में कभी बेटी की मौजूदगी से रौनक रहती थी, वहां अब उसके साथ रिश्ता खत्म करने की बात सामने आ रही है।
जाति की दीवार के आगे रिश्ते पड़े कमजोर?
यह घटना एक बार फिर समाज में अंतरजातीय विवाह को लेकर मौजूद सोच पर सवाल खड़े कर रही है। शादी को लेकर परिवार की नाराजगी किस हद तक पहुंच सकती है, इसका उदाहरण इस मामले में देखने को मिल रहा है। हालांकि, परिवार के इस फैसले के पीछे की पूरी परिस्थिति और सभी पक्षों की प्रतिक्रिया अभी सामने आना बाकी है।
आखिर शादी की सजा रिश्ते खत्म करना क्यों?
फिलहाल इस मामले में संबंधित पक्षों की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि बेटी और उसके पति का पक्ष क्या है तथा परिवार के बीच बातचीत या समझौते की कोई कोशिश हुई है या नहीं।
लेकिन इस घटना ने कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। क्या अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनना इतना बड़ा अपराध है कि माता-पिता अपनी ही बेटी को जीते-जी मृत मान लें? क्या जाति की दीवार पार करने पर वर्षों के रिश्ते एक झटके में खत्म कर दिए जाने चाहिए?
कटिहार की यह घटना सिर्फ एक प्रेम विवाह की कहानी नहीं, बल्कि परिवार, सामाजिक सोच और रिश्तों के बीच खड़े टकराव की तस्वीर बनकर सामने आई है।
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