कटिहार: कहीं घंटियों की गूंज, कहीं देवी भागवत कथा के प्रवचन और कहीं मां के जयकारों से गूंजता मंदिर परिसर। नवरात्र आते ही कटिहार के समेली प्रखंड की डूमर पंचायत में स्थित सार्वजनिक मनोकामना वैष्णवी दुर्गा मंदिर का माहौल भक्तिमय हो उठता है। इलाके में यह मंदिर ‘डूमर वाली मैया’ के नाम से प्रसिद्ध है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था है कि मां के दरबार में सच्चे मन से नारियल चढ़ाकर मांगी गई मन्नत पूरी होती है।
इस मंदिर की पहचान सिर्फ श्रद्धालुओं की भीड़ नहीं, बल्कि इसकी अनूठी पूजा परंपरा, पुराना इतिहास और ग्रामीणों की सामूहिक भागीदारी भी है। यहां मां दुर्गा को नारियल और चुनरी चढ़ाई जाती है। मंदिर में जीव की बलि नहीं दी जाती। नवरात्र में कटिहार के अलावा आसपास के इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
आधा नारियल मां के दरबार में, आधा घर ले जाते हैं भक्त
डूमर वाली मैया के दरबार में नारियल चढ़ाने की परंपरा खास मानी जाती है। श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर मां के सामने नारियल अर्पित करते हैं। परंपरा के अनुसार, नारियल का आधा हिस्सा मंदिर में छोड़ दिया जाता है, जबकि दूसरा आधा प्रसाद के रूप में घर ले जाकर परिवार और अन्य लोगों के बीच बांटा जाता है।
मंदिर से जुड़े आचार्य रमेश झा और पंडित रविंद्र ठाकुर बताते हैं कि यहां सालभर श्रद्धालु आते हैं। मनोकामना पूरी होने के बाद भी भक्त मां के दरबार में पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं। हालांकि, दुर्गापूजा के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भीड़ काफी बढ़ जाती है।
1879 में रखी गई थी शिव मंदिर की नींव, 2010 में स्थापित हुईं मां दुर्गा
डूमर वाली मैया के मंदिर की कहानी करीब डेढ़ सदी पुरानी परंपरा से जुड़ी है। स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्ष 1879 में स्वर्गीय जोगश्वर प्रसाद सिन्हा ने यहां शिव मंदिर की आधारशिला रखी थी। उस समय गांव में दुर्गा मंदिर नहीं था। मां दुर्गा की पूजा के लिए ग्रामीणों को कुरसेला, बरारी, पोठिया या गेड़ाबाड़ी जैसे स्थानों तक जाना पड़ता था। ये स्थान गांव से करीब 10 से 12 किलोमीटर दूर बताए जाते हैं।
ग्रामीणों की इसी परेशानी को देखते हुए वर्ष 2010 में शिव मंदिर परिसर में मां दुर्गा के मंदिर की स्थापना की गई। मंदिर निर्माण में अंगिका भाषा के प्रसिद्ध गायक सुनील छैला बिहारी की भी महत्वपूर्ण भूमिका बताई जाती है। इसके बाद यह मंदिर धीरे-धीरे आसपास के क्षेत्रों में आस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में पहचान बनाने लगा।
कटिहार जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर आज ‘मनोकामना पूर्ण मंदिर’ के नाम से भी जाना जाता है।
1001 कन्याओं और महिलाओं की कलश शोभायात्रा है खास पहचान
डूमर वाली मैया के दरबार में दुर्गापूजा की शुरुआत भव्य कलश शोभायात्रा से होती है। हर साल प्रथम पूजा के अवसर पर आयोजित इस यात्रा में 1001 कन्याओं और महिलाओं के शामिल होने की परंपरा है। पुरुष और बच्चे भी पूरे उत्साह के साथ इसमें भाग लेते हैं।
कलश शोभायात्रा मंदिर परिसर से निकलकर डूमर चौक होते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग-31 के रास्ते बरंडी-कोसी नदी तक पहुंचती है। वहां से कलश में जल भरने के बाद श्रद्धालु पूरे डूमर गांव का भ्रमण करते हैं। यात्रा में राधा-कृष्ण की झांकी भी निकाली जाती है, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र रहती है।
यह शोभायात्रा धार्मिक आस्था के साथ गांव की सामूहिक भागीदारी और परंपरा का भी प्रतीक है।
दस दिनों तक देवी भागवत कथा, वृंदावन के संत कर रहे प्रवचन
नवरात्र के दौरान मंदिर परिसर में पहली पूजा से दसवीं पूजा तक दस दिवसीय श्रीमद् देवी भागवत कथा का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष कथा वाचन के लिए उत्तर प्रदेश के वृंदावन धाम से स्वामी संजय कृष्ण शास्त्री जी महाराज पहुंचे हैं। उनके प्रवचन सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुट रहे हैं।
धार्मिक कथा के साथ कलाकारों की झांकियां और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजन का आकर्षण बढ़ा रही हैं। मंदिर परिसर में मां दुर्गा के साथ मां सरस्वती, मां लक्ष्मी, भगवान गणेश, भगवान कार्तिकेय, भगवान शिव, माता पार्वती, महिषासुर और बाघ सहित विभिन्न प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं।
समस्तीपुर से आए मूर्तिकार योगेंद्र पंडित अपने सहयोगियों के साथ प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। प्रतिमाओं को भव्य रूप देने के लिए कलाकार दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
ग्रामीणों के सहयोग से भव्य आयोजन की तैयारी
डूमर में दुर्गापूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गांव की सामूहिक भागीदारी का भी उदाहरण है। मंदिर परिसर की सजावट, प्रतिमा निर्माण, धार्मिक कार्यक्रमों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ग्रामीण मिलकर तैयारी कर रहे हैं।
मंदिर कमेटी और दुर्गापूजा समिति के सदस्य आयोजन को सफल बनाने में जुटे हैं। समिति के अध्यक्ष सह पूर्व मुखिया विनोद कुमार चौधरी के नेतृत्व में ग्रामीण तैयारियों को अंतिम रूप दे रहे हैं।
डूमर वाली मैया का दरबार नवरात्र में आस्था, परंपरा और सामूहिक उत्साह का केंद्र बन जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालु मां के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। पुरानी मान्यताओं से जुड़ी पूजा पद्धति और गांव की सामूहिक भागीदारी ने इस मंदिर को क्षेत्र की धार्मिक पहचान का अहम हिस्सा बना दिया है।
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