लखीसराय: बिहार के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक सनसनीखेज मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है। शेखपुरा जिले के बरबीघा नगर परिषद में बतौर कार्यपालक पदाधिकारी (EO) तैनात डॉ. रमण कुमार एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में आ गए हैं। मामला उनके लखीसराय नगर परिषद के पूर्व कार्यकाल से जुड़ा हुआ है, जहां करीब 45 लाख रुपये की कथित फर्जी निकासी और मनमाने भुगतान का गंभीर पर्दाफाश हुआ है। इस वित्तीय खेल के सामने आने के बाद नगर परिषद की बोर्ड बैठक में जमकर भूचाल आया और अब इस पूरे मामले की परतें उधेड़ने के लिए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन कर दिया गया है।
बोर्ड बैठक में खुला वित्तीय अनियमितता का कच्चा चिट्ठा
यह पूरा मामला तब खुलकर सामने आया जब लखीसराय नगर परिषद की बोर्ड बैठक का कार्यवृत्त सार्वजनिक हुआ। बैठक के दौरान वार्ड संख्या-7 के तेज-तर्रार पार्षद सुनील कुमार ने पूर्व EO डॉ. रमण कुमार के कार्यकाल के दौरान हुए भुगतानों पर कड़ा ऐतराज जताया। पार्षद का सीधा और विस्फोटक आरोप था कि तत्कालीन EO ने अपने कार्यकाल में नियमों को ताक पर रखते हुए लगभग 40 से 45 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि का बंदरबांट कर डाला।
नियमों को ठेंगा दिखाकर केवल ‘वाउचर’ से हुआ भुगतान?
शिकायत में सबसे चौकाने वाली बात यह सामने आई कि इस लाखों रुपये के भारी-भरकम भुगतान के लिए किसी भी वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। आरोप के मुताबिक:
- इस भुगतान के लिए नगर परिषद की सशक्त स्थायी समिति से कोई अनुमति नहीं ली गई।
- नगर परिषद के सामान्य बोर्ड की बैठकों में इस पर कोई मुहर या स्वीकृति नहीं दी गई थी।
- इन तमाम कानूनी अड़चनों से बचने के लिए अधिकारियों ने कथित तौर पर सिर्फ सादे या कागजी वाउचर के माध्यम से सारा खेल कर डाला।
पार्षद सुनील कुमार ने इस मनमानी पर कड़ा रुख अपनाते हुए मांग की है कि इस अवैध तरीके से डकारे गए एक-एक पाई की वसूली (Recovery) की जाए और इस वित्तीय घोटाले में शामिल सभी पर्दे के पीछे के खिलाड़ियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
सभापति के कड़े तेवर: जांच के लिए 3 सदस्यीय कमेटी गठित
मामले की गंभीरता, पार्षदों के तीखे तेवर और बढ़ते हंगामे को देखते हुए लखीसराय नगर परिषद के सभापति अरविंद पासवान ने तत्काल प्रभाव से बड़ा एक्शन लिया। बोर्ड के निर्णय के अनुसार, इस पूरे 45 लाख के संदिग्ध खेल की गहराई से छानबीन के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन कर दिया गया है। साथ ही, इस पूरी प्रशासनिक कार्रवाई के प्रस्ताव की आधिकारिक कॉपी राज्य सरकार को भी भेज दी गई है, जिससे यह मामला अब पटना के गलियारों तक गूंजने लगा है।
अब इन दस्तावेजों से खुलेगा राज, आगे क्या?
सूत्रों का कहना है कि यदि जांच समिति की तहकीकात में यह आरोप सौ फीसदी सच साबित होते हैं, तो यह नगर परिषद की वित्तीय पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही पर एक बहुत बड़ा बदनुमा दाग होगा। सच्चाई को सामने लाने के लिए जांच कमेटी निम्नलिखित गुप्त और आधिकारिक दस्तावेजों को खंगालेगी:
- भुगतान से जुड़े मूल और संदिग्ध वाउचर
- संबंधित विकास कार्यों या खरीद-फरोख्त से जुड़ी फाइलें
- बोर्ड या स्थायी समिति की बैठकों के स्वीकृति आदेश
- बैंक ट्रांजेक्शन और लेखा (Accounts) से जुड़े रिकॉर्ड्स
क्या बरबीघा EO पर गिरेगी गाज?
वर्तमान में डॉ. रमण कुमार बरबीघा नगर परिषद में ईओ के रूप में मलाईदार कुर्सी संभाल रहे हैं, लेकिन उनके पुराने कार्यकाल के इन गंभीर और संगीन आरोपों ने उनकी नींद उड़ा दी है। हालांकि, यह अभी जांच का विषय है कि कथित निकासी तकनीकी रूप से फर्जी साबित होती है या नहीं, लेकिन जिस तरह से लखीसराय बोर्ड ने कड़ाई दिखाई है, उससे यह साफ है कि अगर गड़बड़ी मिली तो विभागीय और कानूनी गाज गिरना तय है।
अब हर किसी की निगाहें इसी बात पर टिकी हैं कि तीन सदस्यीय जांच समिति अपनी रिपोर्ट में क्या सनसनीखेज खुलासे करती है और क्या बरबीघा के EO इस चक्रव्यूह से निकल पाएंगे!
पक्ष जानने की कोशिश, लेकिन EO साहब ने फोन तक नहीं उठाया!
इस पूरे मामले पर जब बरबीघा नगर परिषद के वर्तमान कार्यपालक पदाधिकारी डॉ. रमण कुमार का पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जब उन्हें इस संबंध में फोन मिलाया गया, तो उनके द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया, जिससे उनकी चुप्पी और इस पूरे प्रकरण पर संदेह के बादल और गहरे होते जा रहे हैं।
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