अररिया: क्या बाजार में ब्रांडेड चावल के नाम पर आपको दूसरा चावल बेचा जा रहा है? बिहार के अररिया जिले के फारबिसगंज में चावल की कथित डुप्लीकेट ब्रांडिंग का मामला सामने आने के बाद यह सवाल उठने लगा है। यहां एक राइस मिल के पंजीकृत ब्रांड और नाम की नकल कर चावल बेचने के आरोप में पुलिस ने कार्रवाई की है। छापेमारी के दौरान करीब 150 बोरा चावल पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में एक व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले के नौतनवा स्थित मेसर्स लक्ष्मी राइस मिल के संचालक की शिकायत के बाद की गई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि फारबिसगंज के एक प्रतिष्ठान में उनकी कंपनी के पंजीकृत नाम और ब्रांड से मिलती-जुलती बोरियों का इस्तेमाल कर चावल बेचा जा रहा था। हालांकि, चावल की गुणवत्ता, ब्रांडिंग और कथित नकल को लेकर लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
यूपी की राइस मिल संचालक ने दर्ज कराई शिकायत
मिली जानकारी के अनुसार, मेसर्स लक्ष्मी राइस मिल के संचालक ने 7 अक्टूबर 2026 को अररिया के पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में फारबिसगंज शहर के चौपाटपट्टी चौक, वार्ड संख्या-16 स्थित मेसर्स गणेश भंडार पर कंपनी के पंजीकृत नाम और ब्रांड की कथित नकल कर चावल बेचने का आरोप लगाया गया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि उनकी फर्म कई वर्षों से अपने पंजीकृत ब्रांड के तहत चावल का उत्पादन और बिक्री करती आ रही है। आरोप है कि संबंधित प्रतिष्ठान में उसी नाम या उससे मिलती-जुलती ब्रांडिंग वाली बोरियों में चावल भरकर बाजार में बेचा जा रहा था। इससे कंपनी के कारोबार और व्यावसायिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई।
शिकायत के बाद पुलिस की छापेमारी
लिखित शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित प्रतिष्ठान पर छापेमारी की। इस दौरान करीब 150 बोरा चावल पकड़े जाने की जानकारी दी गई है। पुलिस ने एक व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है।
फारबिसगंज के डीएसपी राजकिशोर ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि राइस मिल संचालक की शिकायत पर छापेमारी की गई है। मामले की जांच की जा रही है और संबंधित तथ्यों की पड़ताल के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
क्या ब्रांडेड बोरी में भरा जा रहा था दूसरा चावल?
इस मामले का मुख्य सवाल यही है कि जब्त बोरियों पर इस्तेमाल किए गए नाम और ब्रांड का अधिकार किसके पास था और उनमें भरे चावल का वास्तविक स्रोत क्या है। पुलिस को ब्रांडिंग से जुड़े दस्तावेजों, शिकायतकर्ता के दावों और जब्त चावल की पहचान के आधार पर मामले की जांच करनी है।
यदि जांच में किसी पंजीकृत ब्रांड का अनधिकृत इस्तेमाल साबित होता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि जब्त चावल की गुणवत्ता की जांच कराई गई है या नहीं। इसलिए इसे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक या मिलावटी चावल बताना अभी उचित नहीं होगा।
बाजार में चावल खरीदते समय किन बातों पर दें ध्यान?
इस घटना के बाद उपभोक्ताओं के लिए भी खाद्य उत्पादों की पैकिंग और लेबल पर ध्यान देना जरूरी है। चावल खरीदते समय पैकेट या बोरी पर निर्माता अथवा पैकर का नाम, पूरा पता, बैच या लॉट नंबर और अन्य जरूरी विवरण देखें। पैकिंग संदिग्ध लगे या ब्रांड की जानकारी में अंतर दिखे, तो विक्रेता से बिल लें और संबंधित खाद्य सुरक्षा या उपभोक्ता विभाग में शिकायत कर सकते हैं।
हालांकि, फारबिसगंज के इस मामले में आम उपभोक्ताओं को बेचे गए चावल की गुणवत्ता या स्वास्थ्य संबंधी खतरे को लेकर अभी कोई पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
जांच के बाद खुलेगा पूरा मामला
फिलहाल पुलिस कथित ब्रांड नकल, चावल के स्रोत और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है। करीब 150 बोरा चावल पकड़े जाने और एक व्यक्ति को हिरासत में लिए जाने के बाद मामले पर नजर बनी हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि ब्रांडिंग में नियमों का उल्लंघन हुआ था या नहीं और इस मामले में आगे क्या कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
ये खबर भी पढ़े: पटना मरीन ड्राइव पर स्टंटबाजी पड़ी भारी; दो मामलों में FIR दर्ज, ड्राइविंग लाइसेंस निलंबन की तैयारी!