गया: पितृपक्ष मेला के दौरान गुरुवार की शाम गया के देवघाट पर आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। फल्गु नदी के किनारे विष्णुपद क्षेत्र स्थित देवघाट घी के दीयों की रोशनी से जगमगा उठा। पितरों की स्मृति और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए यहां पितृ दीपावली मनाई गई। शाम ढलते ही घाट पर एक के बाद एक दीप जलने लगे और देखते ही देखते पूरा देवघाट रोशनी से नहा उठा।
देवघाट पर जलते सैकड़ों-हजारों दीपों के बीच श्रद्धालुओं ने स्वास्तिक और ॐ के निशान भी बनाए। दीपों से सजा घाट, फल्गु नदी का किनारा और आसपास की रंग-बिरंगी रोशनी ने पूरे माहौल को बेहद आकर्षक बना दिया। इस अलौकिक दृश्य को देखने के लिए घाट पर मौजूद लोग कुछ देर ठहरते नजर आए और कई श्रद्धालु इस पल को अपने कैमरे में भी कैद करते दिखे।
पितरों की आत्मशांति और मोक्ष की कामना
पितृपक्ष मेला के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु गया पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मशांति और मोक्ष की कामना को लेकर फल्गु नदी के तट और विष्णुपद क्षेत्र में पिंडदान, तर्पण और अन्य धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं।
इसी धार्मिक परंपरा के तहत पितृपक्ष की त्रयोदशी तिथि की शाम देवघाट पर पितृ दीपावली मनाने की परंपरा है। श्रद्धालु अपने पितरों को याद करते हुए दीपदान करते हैं और उनके प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं।
मान्यता- पितरों के लिए रोशन किया जाता है मार्ग
धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृपक्ष के दौरान पितर भी गया आते हैं। त्रयोदशी की शाम उनके सम्मान में दीप जलाकर दीपदान किया जाता है। मान्यता है कि दीपों की रोशनी पितरों के लिए स्वर्ग जाने के मार्ग को प्रकाशमय करती है। इसी आस्था और विश्वास के साथ श्रद्धालुओं ने देवघाट पर बड़ी संख्या में घी के दीप जलाए।
दीप जलाने के साथ श्रद्धालुओं ने अपने पितरों का स्मरण किया और उनकी आत्मा की शांति तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। घाट पर एक साथ जलते दीपों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
दीपों से उकेरा गया स्वास्तिक और ॐ
पितृ दीपावली के अवसर पर देवघाट को सिर्फ दीपों से ही नहीं सजाया गया, बल्कि श्रद्धालुओं ने दीपों की मदद से स्वास्तिक और ॐ जैसे धार्मिक प्रतीक भी बनाए। अंधेरा बढ़ने के साथ इन प्रतीकों की चमक और अधिक स्पष्ट दिखाई देने लगी।
फल्गु नदी के किनारे दीपों की लंबी कतारें और उनके बीच बनाए गए धार्मिक चिह्न श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने रहे। विष्णुपद मंदिर क्षेत्र से लेकर देवघाट तक आस्था की रोशनी का यह नजारा देर शाम तक बना रहा।
पितरों के सम्मान में दीपदान और आतिशबाजी
पितृ दीपावली को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। मान्यता के अनुसार इस दिन पितरों के सम्मान में दीप जलाने के साथ पटाखे भी फोड़े जाते हैं। देवघाट पर भी देर शाम तक श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही और धार्मिक उत्साह का माहौल नजर आया।
दीपों की रोशनी, फल्गु नदी का शांत किनारा, विष्णुपद क्षेत्र की धार्मिक आभा और पितरों के प्रति श्रद्धालुओं की भावनाएं मिलकर देवघाट पर एक ऐसा दृश्य बना रही थीं, जो पितृपक्ष मेले के सबसे खास नजारों में शामिल रहा।
आस्था की रोशनी में नहाया देवघाट
गुरुवार की शाम देवघाट पर जलते दीप सिर्फ रोशनी का माध्यम नहीं थे, बल्कि अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, स्मरण और धार्मिक विश्वास का प्रतीक भी बने। हजारों दीपों की लौ के बीच श्रद्धालु अपने पितरों को याद करते रहे। फल्गु नदी के तट पर देर रात तक आस्था का यह सिलसिला जारी रहा।
पितृ दीपावली के मौके पर देवघाट का यह नजारा यह संदेश देता नजर आया कि पितृपक्ष केवल कर्मकांड का पर्व नहीं, बल्कि अपनी जड़ों, पूर्वजों और पारिवारिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर भी है।
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