पटना/वैशाली: बिहार की धरती के लिए यह गर्व और भावुकता से भरा पल है। वैशाली से ताल्लुक रखने वाले भारत के स्टार पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी और पैरालंपिक चैंपियन प्रमोद भगत अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगे की अगुवाई करते नजर आएंगे। प्रमोद भगत को पैरा-टेबल टेनिस की दिग्गज खिलाड़ी भाविना पटेल के साथ जापान में होने वाले एशियाई पैरा खेलों के उद्घाटन समारोह में भारत का ध्वजवाहक चुना गया है। दोनों 18 अक्टूबर को नागोया में भारतीय दल का नेतृत्व करते हुए तिरंगा थामेंगे।
प्रमोद भगत के लिए यह सम्मान उनकी लंबी खेल यात्रा की एक और बड़ी उपलब्धि है। कभी सीमित संसाधनों और चुनौतियों के बीच अपने खेल का सफर शुरू करने वाले प्रमोद ने अपनी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर पैरा-बैडमिंटन में दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों में अपनी पहचान बनाई। अब उन्हें भारत के विशाल पैरा-खेल दल की अगुवाई करने का सम्मान मिलना उनके सफर में एक बेहद खास अध्याय जोड़ता है।
वैशाली से निकला सितारा, दुनिया के मंच तक पहुंचा
प्रमोद भगत का संबंध बिहार के वैशाली से है। उनकी सफलता की कहानी संघर्ष और जुनून से भरी रही है। बचपन में आई शारीरिक चुनौती के बावजूद उन्होंने खेल के प्रति अपना जुनून कम नहीं होने दिया। परिवार के मुताबिक, शुरुआती दौर में संसाधनों की कमी के बावजूद प्रमोद ने बैडमिंटन के प्रति अपनी रुचि को लगातार आगे बढ़ाया।
धीरे-धीरे उनका खेल निखरता गया और उन्होंने राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बनाई। मेहनत का सबसे बड़ा परिणाम उन्हें टोक्यो पैरालंपिक में मिला, जहां उन्होंने पुरुष एकल SL3 वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। पैरालंपिक की आधिकारिक प्रोफाइल भी उनके टोक्यो 2020 अभियान में पुरुष एकल में स्वर्ण पदक की पुष्टि करती है।
अब हाथ में होगा तिरंगा
एशियाई पैरा खेलों में ध्वजवाहक चुना जाना किसी भी खिलाड़ी के लिए बेहद सम्मान की बात होती है। प्रमोद भगत के लिए यह जिम्मेदारी इसलिए भी खास है क्योंकि इस बार वह खुद पदक के लिए मैदान में उतरने के साथ-साथ उद्घाटन समारोह में भारतीय दल की पहचान और गौरव का प्रतिनिधित्व भी करेंगे।
उनके साथ भाविना पटेल भी भारतीय दल की ध्वजवाहक होंगी। दोनों खिलाड़ियों का चयन उनके लंबे और शानदार पैरा-स्पोर्ट्स करियर को देखते हुए किया गया है। भारतीय दल के नेतृत्व की यह जिम्मेदारी उन्हें देश के पैरा-खेल समुदाय की उम्मीदों और आकांक्षाओं का प्रतिनिधि भी बनाती है।
प्रमोद भगत के नाम कई बड़ी उपलब्धियां
प्रमोद भगत पैरा-बैडमिंटन के सबसे चर्चित भारतीय खिलाड़ियों में शामिल हैं। एशियाई पैरा खेलों में भी उनका शानदार रिकॉर्ड रहा है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार उन्होंने 2014 से 2023 के बीच एशियाई पैरा खेलों में छह पदक जीते हैं, जिनमें दो स्वर्ण और चार कांस्य पदक शामिल हैं।
टोक्यो पैरालंपिक का स्वर्ण पदक उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रहा है। उन्होंने उस मंच पर न केवल भारत का गौरव बढ़ाया, बल्कि देशभर के लाखों खिलाड़ियों और युवाओं के लिए प्रेरणा भी बने।
भाविना पटेल के साथ होगी तिरंगे की अगुवाई
प्रमोद भगत के साथ भाविना पटेल को भी भारतीय दल का ध्वजवाहक बनाया गया है। पैरा-टेबल टेनिस में अपनी पहचान बना चुकीं भाविना ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।
दोनों खिलाड़ियों का एक साथ तिरंगा लेकर उद्घाटन समारोह में आगे चलना भारतीय पैरा-स्पोर्ट्स की बढ़ती ताकत और पहचान का प्रतीक होगा।
18 अक्टूबर से शुरू होगा मुकाबलों का दौर
एशियाई पैरा खेल 18 से 24 अक्टूबर 2026 तक जापान के आइची-नागोया क्षेत्र में आयोजित होंगे। एशिया के अलग-अलग देशों के पैरा खिलाड़ी इन खेलों में हिस्सा लेंगे। भारतीय दल भी विभिन्न खेलों में पदक की चुनौती पेश करेगा। उद्घाटन समारोह में प्रमोद भगत और भाविना पटेल तिरंगे के साथ भारतीय दल का नेतृत्व करेंगे।
भारत के लिए यह आयोजन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश के पैरा खिलाड़ी लगातार अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी क्षमता साबित कर रहे हैं। ऐसे में प्रमोद भगत और भाविना पटेल को ध्वजवाहक की जिम्मेदारी मिलना पूरे भारतीय दल के लिए उत्साह बढ़ाने वाला क्षण है।
बिहार के लिए क्यों खास है यह सम्मान?
प्रमोद भगत का वैशाली से जुड़ाव बिहार के लोगों के लिए इस उपलब्धि को और खास बनाता है। जिस खिलाड़ी ने संघर्षों के बीच अपना रास्ता बनाया, वही अब अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर भारत के तिरंगे को लेकर आगे चलेगा।
उनकी यह उपलब्धि बिहार के उन खिलाड़ियों के लिए भी संदेश है जो सीमित संसाधनों या कठिन परिस्थितियों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। प्रमोद का सफर बताता है कि खेल में सफलता सिर्फ प्रतिभा से नहीं, बल्कि लंबे समय तक की गई मेहनत, अनुशासन और लगातार आगे बढ़ने के जज्बे से हासिल होती है।
तिरंगे के साथ जुड़ेंगी करोड़ों उम्मीदें
18 अक्टूबर को जब प्रमोद भगत और भाविना पटेल भारतीय दल के साथ उद्घाटन समारोह में आगे बढ़ेंगे, तब उनके हाथों में सिर्फ देश का तिरंगा नहीं होगा, बल्कि भारतीय पैरा खिलाड़ियों की मेहनत और करोड़ों देशवासियों की उम्मीदों का प्रतीक भी होगा।
वैशाली की धरती से निकले प्रमोद भगत के लिए यह सिर्फ एक खेल सम्मान नहीं, बल्कि उस संघर्ष और जुनून की पहचान है जिसने उन्हें विश्व मंच तक पहुंचाया। अब जापान की धरती पर जब वह तिरंगा थामेंगे, तो बिहार से लेकर पूरे भारत के लिए यह गर्व का एक यादगार क्षण होगा।
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