शेखपुरा। मोटर चोरी के आरोप में दो युवकों को पकड़ने के बाद सुजावलपुर गांव में ऐसा माहौल बना कि ग्रामीण खुद ही सजा देने की तैयारी में जुट गए। ग्रामीणों ने दोनों युवकों को पकड़ लिया और कथित तौर पर उनके बाल मुंडवाकर गधे पर बैठाकर गांव में घुमाने की तैयारी शुरू कर दी। इसी बीच कोरमा थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई और दोनों युवकों को हिरासत में लेकर भीड़ के बीच से बाहर निकाला।
मामला सुजावलपुर गांव के बघार का है, जहां एक बोरिंग से बिजली का मोटर चोरी कर भागने का आरोप दोनों युवकों पर लगा। ग्रामीणों को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने पीछा कर दोनों को पकड़ लिया। इसके बाद मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई और मामला देखते ही देखते तनावपूर्ण हो गया।
चोरी के आरोप से ‘गांव की सजा’ तक पहुंचा मामला
ग्रामीणों के गुस्से का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दोनों युवकों को कथित तौर पर बाल मुंडवाकर गधे पर बैठाकर गांव में घुमाने की तैयारी की जा रही थी। हालांकि, इससे पहले कि ग्रामीण अपनी योजना को अंजाम दे पाते, पुलिस को इसकी सूचना मिल गई।
थानाध्यक्ष मुरारी कुमार और एसआई राजकिशोर पासवान के नेतृत्व में पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और दोनों युवकों को अपने कब्जे में ले लिया। पुलिस की कार्रवाई के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया।
पुलिस के सामने खुली मोटर चोरी की कहानी
पकड़े गए युवकों की पहचान गगौर गांव निवासी रोहित कुमार और सुरेश कुमार के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, दोनों पर शेखपुरा और लखीसराय जिले में बिजली मोटर चोरी की कई घटनाओं में शामिल होने का आरोप है।
पुलिस का कहना है कि कुछ दिन पहले पाली और लक्ष्मीपुर गांव के बोरिंग से चोरी किए गए मोटर को शेखपुरा शहर के महादेव नगर स्थित कबाड़खाने में बेचने की जानकारी मिली थी। पुलिस ने वहां छापेमारी कर चोरी का मोटर बरामद किया।
भीड़ से बचाया, अस्पताल पहुंचाया
ग्रामीणों की पकड़ में आने के दौरान दोनों युवक मामूली रूप से घायल हुए। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेने के बाद सदर अस्पताल शेखपुरा पहुंचाया, जहां उनका इलाज कराया गया।
अब पुलिस दोनों से पूछताछ कर रही है। जांच का फोकस सिर्फ सुजावलपुर की घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि पूर्व में हुई मोटर चोरी की घटनाओं और चोरी के सामान को खपाने वाले संभावित नेटवर्क तक भी पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
सबक सिखाने की तैयारी या कानून हाथ में लेने की कोशिश?
घटना ने गांव में चोरी को लेकर लोगों के गुस्से को जरूर सामने ला दिया, लेकिन साथ ही यह सवाल भी खड़ा कर दिया कि क्या चोरी के आरोप में भीड़ को खुद सजा देने का अधिकार है?
ऐन वक्त पर पुलिस के पहुंचने से मामला और बिगड़ने से बच गया। अब ग्रामीणों के ‘फैसले’ की जगह पुलिस की जांच से तय होगा कि दोनों युवकों की कथित भूमिका क्या थी और मोटर चोरी के पीछे वास्तव में कौन-कौन लोग शामिल हैं।
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