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Bihar: राजद में बड़ा संगठनात्मक बदलाव; 43 में से 20 जिला अध्यक्षों की छुट्टी संभव, तेजस्वी यादव युवाओं पर लगाएंगे दांव!

पटना: बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अपने संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी में है। बांकीपुर उपचुनाव में हार...

पटना: बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अपने संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी में है। बांकीपुर उपचुनाव में हार और 2025 के विधानसभा चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं होने के बाद पार्टी नेतृत्व ने ब्लॉक से लेकर जिला और पंचायत स्तर तक की कमेटियां भंग कर दी हैं। अब नए सिरे से संगठन तैयार करने की कवायद शुरू हो गई है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक बिहार में राजद के करीब 43 जिला अध्यक्षों में से लगभग 20 पुराने चेहरों को दोबारा मौका नहीं मिलने की संभावना है। तेजस्वी यादव की नई रणनीति में युवाओं को संगठन में अधिक जिम्मेदारी देने के साथ-साथ सक्रिय, समर्पित और साफ छवि वाले नेताओं को आगे लाने पर जोर है।

43 जिला अध्यक्षों में यादव-मुस्लिम की हिस्सेदारी 53%

कमेटियां भंग होने से पहले राजद के 43 जिला अध्यक्षों में 16 यादव और 7 मुस्लिम थे। यानी दोनों समुदायों के कुल 23 जिला अध्यक्ष थे, जो करीब 53 फीसदी बैठता है।

इसके अलावा 9 गैर-यादव OBC-EBC, 6 SC, 2 सवर्ण, 1 वैश्य और 1 ST समाज से जिला अध्यक्ष रहे हैं।

नई कमेटी बनाते समय पार्टी अपने पारंपरिक यादव-मुस्लिम आधार को बनाए रखते हुए अन्य सामाजिक समूहों को भी संगठन में पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की कोशिश कर सकती है। क्षेत्र के सामाजिक समीकरण और पार्टी के प्रति नेता की सक्रियता को भी महत्व दिए जाने की बात सामने आई है।

नए जिला अध्यक्षों के चयन के तीन प्रमुख आधार

पार्टी सूत्रों के मुताबिक नए जिला अध्यक्षों के चयन में मुख्य रूप से तीन बातों का ध्यान रखा जाएगा—

  1. उम्र 60 वर्ष से अधिक नहीं हो।
  2. विवादित छवि वाले नेताओं को जिम्मेदारी नहीं दी जाए।
  3. परिपक्व और सक्रिय युवाओं को संगठन में आगे बढ़ाया जाए।

इसके साथ ही पार्टी के प्रति निष्ठा, पिछले कामकाज और सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की क्षमता भी महत्वपूर्ण आधार होंगे।

करीब 20 पुराने जिलाध्यक्षों की हो सकती है छुट्टी

पार्टी सूत्रों के अनुसार करीब 15 पूर्व जिला अध्यक्ष उम्र की वजह से नई जिम्मेदारी से बाहर हो सकते हैं। वहीं 5-6 नेताओं के विवादों में रहने या पार्टी नेतृत्व से नाराजगी जताने के कारण दोबारा जिलाध्यक्ष बनने की संभावना कम बताई जा रही है।

इस तरह करीब 20 पुराने चेहरों की जगह नए नेताओं को मौका मिल सकता है।

लखीसराय के कालीचरण दास का उदाहरण भी सामने है, जिन्होंने अधिक उम्र के कारण पहले ही पद से इस्तीफा दे दिया था।

विवादित चेहरों पर भी नजर

पार्टी के भीतर जिन जिला अध्यक्षों को लेकर विवाद सामने आए या चुनाव के दौरान नाराजगी दिखाई दी, उनके नामों पर भी दोबारा विचार किया जा सकता है।

भागलपुर: चंद्रशेखर से जुड़ा शराब पीने का वीडियो वायरल हुआ था।

वैशाली: बैजनाथ सिंह चंद्रवंशी का कथित अपशब्द वाला ऑडियो वायरल होने के बाद विवाद हुआ था।

सीवान: विपिन कुशवाहा टिकट से जुड़े मामले में नाराज हुए थे। उन्होंने त्यागपत्र भी दिया था। बाद में उन्हें मनाया गया, लेकिन चुनाव के दौरान उनकी सक्रियता को लेकर सवाल उठे।

किशनगंज: विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के कोटे में टिकट जाने से अंजार नईमी के नाराज होने की बात सामने आई थी।

कई जिलों में पुराने नेताओं को मिल सकता है मौका

सभी पुराने जिला अध्यक्षों को हटाया जाएगा, ऐसा नहीं है। जिन नेताओं की संगठन में पकड़ मजबूत है और जिनके खिलाफ कोई बड़ा विवाद नहीं है, उन्हें दोबारा जिम्मेदारी मिल सकती है।

आरा (भोजपुर): बीरबल यादव लगातार तीन टर्म यानी करीब नौ साल से निर्विरोध जिला अध्यक्ष रहे हैं।

बेगूसराय: मोहित यादव दो बार से जिलाध्यक्ष हैं और उनके खिलाफ कोई बड़ा विवाद सामने नहीं आया है।

नालंदा: अशोक कुमार हिमांशु दो टर्म से जिलाध्यक्ष हैं और शक्ति यादव के करीबी माने जाते हैं।

औरंगाबाद: अमरेन्द्र कुशवाहा के विधायक बनने के बाद अनिल टाइगर को कार्यकारी जिला अध्यक्ष बनाया गया था।

समस्तीपुर: यहां दो जिला अध्यक्ष रहे हैं। समस्तीपुर से रोमा भारती और उजियारपुर से राजेश्वर महतो का नाम सामने आता है। दोनों आलोक मेहता के करीबी बताए जाते हैं।

पूर्णिया: अक्टूबर 2025 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मिथिलेश दास को हटाकर पूर्व विधायक दिलीप यादव को जिला अध्यक्ष बनाया गया था। मिथिलेश दास पर पार्टी में सक्रिय भूमिका नहीं निभाने का आरोप लगाया गया था।

सहरसा: मोहम्मद ताहिर लंबे समय से जिला अध्यक्ष हैं और लालू प्रसाद के करीबी रहे हैं। यहां पार्टी के पास विकल्प सीमित बताए जा रहे हैं।

शेखपुरा: संजय कुमार सिंह पूर्व विधायक विजय सम्राट के करीबी हैं। उन्हें दोबारा मौका मिलने की संभावना बताई जा रही है।

अररिया: डॉ. अविनाश आनंद के पिता के.एन. विश्वास लालू प्रसाद के करीबी रहे हैं। उनके नाम को लेकर कोई बड़ा विवाद सामने नहीं आया है।

बक्सर: शेष नाथ सिंह दो बार जिला अध्यक्ष रह चुके हैं। उनके खिलाफ विरोध की बात सामने नहीं आई है।

सीतामढ़ी: सुनील कुशवाहा 2015 में विधायक रह चुके हैं और पार्टी के भरोसेमंद चेहरों में माने जाते हैं।

मोतिहारी: मनोज यादव पूर्व विधायक रह चुके हैं और उनके खिलाफ कोई बड़ा विवाद सामने नहीं आया है।

तेजस्वी क्यों कर रहे हैं संगठन में बदलाव?

1. भाजपा और जन सुराज की चुनौती

राजद के सामने भाजपा के साथ-साथ जन सुराज जैसी नई राजनीतिक ताकत की चुनौती भी है। बांकीपुर उपचुनाव में जन सुराज के प्रशांत किशोर की जीत ने विपक्षी राजनीति में नए समीकरण की चर्चा बढ़ा दी है।

ऐसे में तेजस्वी यादव संगठन को जमीनी स्तर पर अधिक सक्रिय और आक्रामक बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

2. संगठन में नई ऊर्जा लाने की कोशिश

युवा नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देकर राजद संगठन में नई ऊर्जा लाने की रणनीति पर काम कर रहा है। 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र वाले नेताओं की जगह सक्रिय और अपेक्षाकृत युवा चेहरों को मौका देने की तैयारी है।

3. पार्टी में अनुशासन मजबूत करने पर जोर

चुनाव के दौरान पार्टी नेतृत्व के खिलाफ नाराजगी जताने वाले या निष्क्रिय रहने वाले नेताओं की भूमिका पर भी समीक्षा की जा रही है। नए संगठन में निष्ठावान और सक्रिय कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।

4. चुनावी प्रदर्शन की समीक्षा

2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में राजद को 25 सीटें मिली थीं। इसके बाद पार्टी ने संगठन और चुनावी प्रदर्शन की समीक्षा की। अब उन कमजोरियों को दूर करने के लिए जिला और नीचे तक के संगठन में बदलाव किया जा रहा है।

5. हर क्षेत्र के सामाजिक समीकरण पर फोकस

राजद नेतृत्व ‘A टू Z’ सामाजिक समीकरण को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि जिला अध्यक्षों के चयन में पूरे बिहार के लिए एक ही फार्मूला लागू करने के बजाय स्थानीय सामाजिक और राजनीतिक समीकरण को ध्यान में रखने की रणनीति अपनाई जा सकती है।

समर्पित कार्यकर्ताओं को मिलेगी प्राथमिकता

राजद के प्रदेश प्रवक्ता चितरंजन गगन के मुताबिक प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के समय तकनीकी रूप से सभी कमेटियां भंग हो जाती हैं। विधानसभा चुनाव और अन्य कार्यक्रमों के कारण पहले पुरानी कमेटियों को अगली कमेटी बनने तक काम करने की अनुमति दी गई थी, जिसे अब रद्द कर दिया गया है।

उन्होंने बताया कि नए जिला अध्यक्षों के चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। इसमें क्षेत्रीय संतुलन, सामाजिक संतुलन, पार्टी के प्रति निष्ठा, पिछले कामकाज और सभी को साथ लेकर चलने की क्षमता जैसे मानकों को ध्यान में रखा जाएगा।

राजद की नई संगठनात्मक कवायद से साफ है कि पार्टी आने वाले समय में युवा नेतृत्व, सामाजिक संतुलन और जमीनी सक्रियता को प्राथमिकता देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

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Mahuaa News

Author at mahuaanews.com
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