पटना: शिक्षक भर्ती के TRE-4 आंदोलन से ठीक पहले बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के एक वरिष्ठ अधिकारी की टिप्पणी ने नया विवाद खड़ा कर दिया। अभ्यर्थियों को लेकर कही गई कथित अमर्यादित टिप्पणी के बाद परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह को सरकार ने निलंबित करने का निर्देश दे दिया। खास बात यह रही कि विवादित बयान सामने आने के करीब चार घंटे के भीतर कार्रवाई कर दी गई।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में निकली विवादित बात
सोमवार दोपहर BPSC की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी। आयोग के सचिव हेमंत कुमार सिंह और परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह ने TRE-4 आंदोलन और अभ्यर्थियों से जुड़े मुद्दों पर आयोग का पक्ष रखा।
इसी दौरान अनौपचारिक बातचीत में परीक्षा नियंत्रक ने अभ्यर्थियों के आंदोलन को लेकर ‘हाथी चले बाजार, कुत्ते भौंके हजार’ वाली कहावत का इस्तेमाल किया। अधिकारी ने इसे ऑफ द रिकॉर्ड रखने का आग्रह भी किया था, लेकिन टिप्पणी कुछ ही देर में सार्वजनिक हो गई।
बयान सामने आते ही अभ्यर्थियों में नाराजगी फैल गई और सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया शुरू हो गई।
राजनीतिक प्रतिक्रिया के बाद बढ़ा दबाव
विवादित टिप्पणी सामने आने के बाद राजद के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी यादव गर्दनीबाग स्थित धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों से मुलाकात की और अधिकारी की टिप्पणी पर कड़ा विरोध जताया।
तेजस्वी ने इसे अभ्यर्थियों का अपमान बताते हुए संबंधित अधिकारी से माफी की मांग की। रोहिणी आचार्य ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से टिप्पणी पर आपत्ति जताई।
सफाई और खेद भी नहीं बचा पाए कुर्सी
विवाद बढ़ता देख शाम करीब 5 बजे परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी को ठेस पहुंचाना नहीं था और उन्होंने केवल एक लोकोक्ति का इस्तेमाल किया था।
उन्होंने अपनी टिप्पणी पर खेद भी जताया। लेकिन तब तक मामला सरकार के संज्ञान में पहुंच चुका था।
चार घंटे में निलंबन का निर्देश
दोपहर करीब 2 बजे टिप्पणी सामने आने के बाद शाम करीब 6 बजे सरकार की ओर से परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह को निलंबित करने का निर्देश जारी कर दिया गया।
यानी बयान से लेकर निलंबन तक का पूरा घटनाक्रम महज चार घंटे के भीतर सामने आया। कार्रवाई के बाद BPSC और TRE-4 आंदोलन से जुड़े मुद्दे पर राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है।
TRE-4 आंदोलन से पहले बड़ा संदेश
BPSC परीक्षा नियंत्रक के खिलाफ कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब शिक्षक बहाली के लिए TRE-4 आंदोलन को लेकर अभ्यर्थियों में पहले से आक्रोश है। ऐसे में अधिकारी की टिप्पणी ने विवाद को और हवा दे दी।
सरकार की त्वरित कार्रवाई को अधिकारियों के आचरण और अभ्यर्थियों के प्रति संवेदनशीलता को लेकर कड़ा संदेश माना जा रहा है।
बदजुबानी पर सरकार का एक्शन
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि सार्वजनिक पद पर बैठे अधिकारियों की भाषा और व्यवहार को लेकर कितनी सावधानी जरूरी है। विवादित टिप्पणी, फिर सफाई और खेद—लेकिन चार घंटे के भीतर निलंबन का आदेश।
TRE-4 आंदोलन से ठीक पहले BPSC अधिकारी पर हुई यह कार्रवाई अब बिहार में अभ्यर्थियों के आंदोलन का भी अहम मुद्दा बन गई है।
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