धनबाद: लगातार हो रही बारिश भी बुधवार को धनबाद के तोपचांची प्रखंड स्थित कोरकोटा पंचायत के केवट टोला में श्रद्धालुओं की आस्था को नहीं डिगा सकी। मां मनसा की पूजा-अर्चना के बाद गांव में स्थापित सैकड़ों प्रतिमाओं का सामूहिक विसर्जन किया गया। श्रद्धालु प्रतिमाओं को कंधे पर उठाकर जयकारों के बीच महतो तालाब तक पहुंचे।
बारिश के बावजूद विसर्जन यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। पूरे रास्ते मां मनसा के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। महिलाओं और बच्चों ने भी उत्साह के साथ विसर्जन यात्रा में भाग लिया।
करीब 200 घरों में स्थापित की गई थीं प्रतिमाएं
ग्रामीणों के अनुसार, इस वर्ष केवट टोला में करीब 200 घरों में मां मनसा की प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान पूरे होने के बाद सभी प्रतिमाओं को एक साथ विसर्जित करने की परंपरा है।
प्रतिमाओं को घरों से निकालकर श्रद्धालु सामूहिक रूप से तालाब की ओर रवाना हुए। इस दौरान गांव में उत्सव जैसा माहौल नजर आया।
केवट समुदाय के लिए कुलदेवी का दर्जा
केवट टोला में मां मनसा की पूजा का धार्मिक होने के साथ-साथ सामाजिक और पारंपरिक महत्व भी है। गांव में रहने वाले करीब 200 केवट परिवारों के लिए मां मनसा विशेष आस्था का केंद्र हैं। ग्रामीण उन्हें कुलदेवी के रूप में पूजते हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, मां मनसा की विधिवत पूजा पूरी होने के बाद ही तालाब में मछली पकड़ने की शुरुआत करने की परंपरा है। इस तरह यह आयोजन गांव की धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ स्थानीय जीवन और सामाजिक व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है।
पीढ़ियों से चली आ रही है परंपरा
ग्रामीणों का कहना है कि मां मनसा की पूजा और सामूहिक विसर्जन की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। हर वर्ष परिवार अपने-अपने घरों में मां मनसा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा करते हैं और अनुष्ठान पूरा होने के बाद सामूहिक रूप से प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है।
इस दौरान ग्रामीणों की एकजुटता भी देखने को मिली। बारिश के बीच श्रद्धालु पूरे उत्साह से यात्रा में शामिल रहे और लगातार मां मनसा के जयकारे लगाते रहे।
आस्था के आगे मौसम भी बेअसर
विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं ने परिवार और पूरे गांव की सुख-शांति की कामना की। बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने आयोजन को खास बना दिया।
केवट टोला में हुआ यह सामूहिक विसर्जन केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गांव की वर्षों पुरानी परंपरा, सामाजिक एकजुटता और सामुदायिक आस्था की तस्वीर भी पेश करता नजर आया।
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