लखीसराय: स्वतंत्रता दिवस से पहले पूरे देश में चल रहे “हर घर तिरंगा” अभियान के बीच लखीसराय में आयोजित तिरंगा यात्रा कार्यक्रम अब चर्चा और विवाद का विषय बन गया है। शहर के केआरके हाई स्कूल मैदान में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के दौरान बार-बार तकनीकी बाधा उत्पन्न होने से कार्यक्रम की गरिमा पर सवाल उठने लगे हैं। कार्यक्रम में जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधि, शिक्षक, छात्र-छात्राएं और बड़ी संख्या में आम लोग मौजूद थे।
कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रप्रेम और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ हुई। नगर परिषद लखीसराय के सभापति अरविंद पासवान, नगर कार्यपालक पदाधिकारी प्रभात रंजन तथा वार्ड पार्षदों ने केआरके हाई स्कूल मैदान में वृक्षारोपण कर हरित संदेश दिया। इसके बाद तिरंगा यात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
लेकिन जैसे ही राष्ट्रगान शुरू हुआ, पूरा माहौल असहज हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रिकॉर्डिंग के माध्यम से राष्ट्रगान बजाया जा रहा था, जो शुरुआती पंक्तियों के बाद अचानक बंद हो गया। कुछ क्षणों के लिए मैदान में सन्नाटा छा गया। मंच पर बैठे अधिकारी और मैदान में मौजूद लोग एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे।

शिक्षक ने संभाली स्थिति, फिर भी नहीं थमी गड़बड़ी
स्थिति बिगड़ती देख खेल शिक्षक सुशांत कुमार ने स्वयं राष्ट्रगान की अगली पंक्तियां गानी शुरू कीं, लेकिन कुछ देर बाद रिकॉर्डिंग दोबारा चालू हो गई। इससे पूरा राष्ट्रगान बेसुरा और असंगत हो गया। इसके बाद राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के दौरान भी माइक और साउंड सिस्टम ने साथ नहीं दिया। कई बार आवाज बंद होने से कार्यक्रम की गंभीरता प्रभावित होती दिखाई दी।
शहीदों को श्रद्धांजलि के दौरान भी दोहराई गई चूक
जानकारी के अनुसार कार्यक्रम से पहले लखीसराय रेलवे स्टेशन के समीप स्थित शहीद द्वार पर 13 अगस्त 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में शहीद हुए आठ स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वहां भी राष्ट्रगान और वंदे मातरम् की रिकॉर्डिंग के दौरान तकनीकी समस्या सामने आई। इससे कई लोगों ने सवाल उठाया कि जब एक ही दिन दो अलग-अलग स्थानों पर ऐसी स्थिति बनी तो तैयारियों की गंभीरता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।

बच्चे मौजूद, फिर भी रिकॉर्डिंग पर निर्भर रहा कार्यक्रम
कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों के सैकड़ों छात्र-छात्राएं मौजूद थे। विशेष रूप से छात्राओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। इसके बावजूद राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत का सामूहिक गायन कराने के बजाय रिकॉर्डेड ऑडियो पर निर्भरता को लेकर भी लोगों ने सवाल खड़े किए। कई शिक्षकों और अभिभावकों का मानना है कि विद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में बच्चों द्वारा राष्ट्रगान प्रस्तुत कराया जाता तो ऐसी स्थिति से बचा जा सकता था।
अधिकारियों की मौजूदगी में फुसफुसाहट और असहजता
घटना के दौरान जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार, विभिन्न विभागों के अधिकारी, कला एवं संस्कृति विभाग के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग मौजूद थे। राष्ट्रगान और वंदे मातरम् के दौरान आई बाधाओं के बाद कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों के बीच चर्चा का माहौल बन गया। कई लोग इसे तैयारी की कमी बता रहे थे तो कई लोग इसे राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रम में गंभीर लापरवाही मान रहे थे।
डीएम ने तिरंगे का महत्व बताया
हालांकि कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार ने राष्ट्रीय ध्वज के इतिहास, सम्मान और हर घर तिरंगा अभियान के उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने युवाओं और विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
अब उठ रहे ये सवाल
- क्या राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रम से पहले साउंड सिस्टम की जांच नहीं की गई थी?
- राष्ट्रगान और वंदे मातरम् जैसी प्रस्तुति को रिकॉर्डिंग के भरोसे क्यों छोड़ा गया?
- जब सैकड़ों छात्र-छात्राएं मौजूद थे तो सामूहिक गायन की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
- शहीद द्वार और केआरके मैदान दोनों जगह एक जैसी तकनीकी गड़बड़ी कैसे हुई?
इन सवालों को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक इस तकनीकी अव्यवस्था पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
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