सहरसा: कोसी का पानी बढ़ा तो गांव का रास्ता कट गया। सड़क से एंबुलेंस की आवाजाही बंद हुई तो एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए परिजनों ने चारपाई को ही सहारा बना लिया। सहरसा के महिषी प्रखंड के कुंदह ग्राम पंचायत के वार्ड नंबर-4 से सामने आई यह तस्वीर बाढ़ के बीच ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की मुश्किलों को उजागर करती है।
जानकारी के अनुसार विकास पंडित की पत्नी महारानी कुमारी को प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल ले जाना था। लेकिन बाढ़ के कारण गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी। ऐसे में परिजनों ने महिला को चारपाई पर लिटाया और पानी व बाढ़ प्रभावित रास्ते से पैदल चलते हुए एंबुलेंस तक पहुंचाया।
जहां एंबुलेंस नहीं पहुंची, वहां चारपाई बनी सहारा
बाढ़ प्रभावित इलाके में सड़क संपर्क बाधित होने के कारण सबसे बड़ी परेशानी आपात स्थिति में सामने आती है। सामान्य दिनों में जिस रास्ते से वाहन आसानी से गांव तक पहुंचते हैं, पानी बढ़ने के बाद वही रास्ता ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन गया।
गर्भवती महिला को चारपाई पर लेकर जाते परिजनों की तस्वीर इसी परेशानी की कहानी बयां करती है। महिला को पहले गांव से बाहर सुरक्षित स्थान तक ले जाया गया, जहां से एंबुलेंस के जरिए उसे अस्पताल भेजा गया।
बाढ़ में स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंच सबसे बड़ी चुनौती
कोसी इलाके में बाढ़ का असर सिर्फ घरों और सड़कों तक सीमित नहीं रहता। जब गांवों का संपर्क मुख्य सड़क से टूटता है तो बीमार, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन जाता है।
कुंदह पंचायत की यह घटना भी इसी समस्या की ओर इशारा करती है। ग्रामीणों का कहना है कि आपात स्थिति में यदि समय पर वाहन नहीं पहुंचा तो मरीज की परेशानी और बढ़ सकती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांगा स्थायी समाधान
स्थानीय लोगों ने सहरसा के जिलाधिकारी, महिषी विधानसभा के विधायक और पंचायत के मुखिया से बाढ़ प्रभावित गांवों के लिए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के दौरान ऐसे रास्ते चिन्हित किए जाएं, जहां से आपातकालीन वाहन पहुंच सकें। साथ ही जरूरत वाले इलाकों में नाव, एंबुलेंस और स्वास्थ्यकर्मियों की वैकल्पिक व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।
तस्वीर पूछ रही एक बड़ा सवाल
चारपाई पर लेटी गर्भवती महिला और उसे पानी के बीच लेकर जाते परिजन सिर्फ एक परिवार की मजबूरी नहीं दिखाते, बल्कि बाढ़ के समय ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की चुनौती को भी सामने रखते हैं।
सवाल यही है—जब सड़क पर पानी आ जाए, तब क्या किसी मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए चारपाई ही आखिरी सहारा रह जाएगी?
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