पटना: पटना में मंगलवार को छात्रों का गुस्सा सड़कों पर फट पड़ा और राजधानी पूरी तरह आंदोलन के रंग में रंग गई। पेपर लीक और रोजगार की मांग को लेकर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने निकले छात्रों ने जैसे ही इनकम टैक्स गोलंबर पहुंचकर बैरिकेडिंग देखी, माहौल अचानक गरमा गया। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन छात्र पीछे हटने को तैयार नहीं थे। देखते ही देखते बैरिकेडिंग पर चढ़कर नारेबाजी शुरू हुई और फिर उसे तोड़ दिया गया।
हालात बिगड़ते देख पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, लेकिन यह कदम भी छात्रों को रोक नहीं पाया। उल्टा, तेज पानी की बौछारों के बीच छात्र डटकर खड़े रहे और कई तो उसी वाटर कैनन के सामने डांस करने लगे। यह दृश्य पूरे आंदोलन का सबसे अलग और आक्रामक चेहरा बनकर सामने आया, जहां डर की जगह खुली चुनौती दिखाई दी।
प्रदर्शन के दौरान कई छात्र सड़क पर बैठ गए, कुछ लेट गए। पुलिस को उन्हें जबरन उठाकर हटाना पड़ा। इस दौरान हल्की झड़प और तीखी नारेबाजी ने माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया।
इस आंदोलन में सिर्फ छात्र ही नहीं, बल्कि कई बड़े राजनीतिक चेहरे भी खुलकर सड़कों पर उतर आए।
NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ सड़क पर लेटकर विरोध जताते नजर आए, जबकि कांग्रेस के बिहार प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम बैरिकेडिंग पर चढ़कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते दिखे। पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने भी प्रदर्शन में शामिल होकर केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग कर दी।
इसके अलावा विभिन्न छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे, जिससे आंदोलन और उग्र होता गया।
पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सख्ती दिखाते हुए विनोद जाखड़, राजेश राम और छात्रा भाग्य भारती समेत कई लोगों को डिटेन कर लिया। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों का आक्रोश कम नहीं हुआ और वे लगातार नारेबाजी करते रहे।
छात्रों का कहना है कि वे अपने भविष्य के लिए सड़कों पर उतरे हैं और अब उनकी मांगों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। एक छात्र ने साफ कहा कि वे न अपराधी हैं, न उपद्रवी, लेकिन फिर भी उनकी आवाज दबाई जा रही है। वहीं एक छात्रा ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बिना वारंट उनके घर में घुसकर तलाशी ली, जो सरकार के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
यह प्रदर्शन धीरे-धीरे एक बड़े मोर्चे में बदलता नजर आया, जिसमें NSUI के साथ युवा कांग्रेस, AISF, छात्र राजद, SFI, DYFI, भीम आर्मी और कई अन्य संगठनों का समर्थन जुड़ गया। इससे आंदोलन की ताकत और आक्रामकता दोनों बढ़ गईं।
पुलिस पहले से अलर्ट थी। जेपी गोलंबर, इनकम टैक्स चौराहा और डाकबंगला जैसे प्रमुख इलाकों में बैरिकेडिंग और भारी फोर्स तैनात की गई थी। वाटर कैनन की गाड़ियां भी पहले से मौजूद थीं, लेकिन जिस तरह छात्रों ने बैरिकेडिंग तोड़ी और पानी की बौछारों के बीच भी पीछे नहीं हटे, उसने पूरे सिस्टम को सीधी चुनौती दे दी।
फिलहाल पुलिस ने इनकम टैक्स चौराहे से प्रदर्शनकारियों को हटा दिया है, लेकिन हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हैं। पेपर लीक और रोजगार का मुद्दा अब सिर्फ मांग नहीं, बल्कि बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है, और आने वाले दिनों में इसके और तेज होने के संकेत साफ दिख रहे हैं।