गढ़वा: कागज़ पर ‘सम्मान’, ज़मीन पर ‘सवाल’—और जब सच्चाई सामने आई तो पूरी सूची हिल गई। मुख्यमंत्री मईयां सम्मान योजना, जिसे जरूरतमंद महिलाओं के सहारे के तौर पर देखा जा रहा था, अब गढ़वा में फर्जीवाड़े की बड़ी कहानी बनकर उभरी है।
जिले में जब लाभुकों का भौतिक सत्यापन कराया गया, तो तस्वीर चौंकाने वाली निकली। 653 महिलाएं ऐसी पाई गईं, जो इस योजना के मानकों पर खरी ही नहीं उतरती थीं। यानी, जिनके नाम पर सरकारी मदद जा रही थी, वे असल में इसके हकदार ही नहीं थीं।
जांच टीम ने घर-घर जाकर पड़ताल की—किसी की आय सीमा से ज्यादा, किसी के दस्तावेज अधूरे, तो कहीं जानकारी ही गलत निकली। रिपोर्ट जैसे ही प्रशासन तक पहुंची, तुरंत एक्शन हुआ और सभी अपात्र नाम सूची से बाहर कर दिए गए।
अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर ये नाम लिस्ट में आए कैसे? क्या सिस्टम में कहीं सेंध लगी, या फिर स्थानीय स्तर पर लापरवाही ने फर्जीवाड़े को जन्म दिया? प्रशासन इस एंगल से भी जांच में जुट गया है।
अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है। आगे भी सत्यापन की प्रक्रिया जारी रहेगी, ताकि योजना का लाभ केवल वास्तविक जरूरतमंदों तक ही पहुंचे। वहीं, जिन लोगों ने गलत तरीके से फायदा उठाया, उनके खिलाफ कार्रवाई की भी बात कही जा रही है।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता जितनी जरूरी है, उतनी ही जरूरी है जमीनी स्तर पर सख्त निगरानी। वरना ‘सम्मान’ की जगह ‘घोटाला’ शब्द जुड़ते देर नहीं लगती।
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