भागलपुर: सावन की पहली सोमवारी से पहले भागलपुर का सुल्तानगंज पूरी तरह शिवमय हो गया है। गंगा किनारे बसे इस पवित्र नगरी में आस्था का ऐसा संगम देखने को मिल रहा है, जहां देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे लाखों शिवभक्त बाबा बैद्यनाथ धाम देवघर के लिए जल भरने को तैयार हैं।
सोमवार की पहली सोमवारी को करीब 8 लाख कांवरियों के सुल्तानगंज पहुंचने का अनुमान है। श्रद्धालु उत्तरवाहिनी गंगा से जल उठाकर करीब 100 किलोमीटर से ज्यादा लंबी कांवर यात्रा पर देवघर के लिए रवाना होंगे। हर तरफ भगवा रंग, कांवर और ‘बोल बम’ के जयकारों से पूरा इलाका भक्तिमय हो गया है।
नमामि गंगे घाट बना आकर्षण का केंद्र
इस बार श्रद्धालुओं की सबसे ज्यादा भीड़ नए बने नमामि गंगे घाट पर पहुंचने की उम्मीद है। प्रशासन ने इस घाट को विशेष रूप से तैयार कराया है। साफ-सफाई, रोशनी और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यहां विशेष इंतजाम किए गए हैं।
घाटों पर महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के स्नान के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई है। चेंजिंग रूम, अस्थायी शौचालय और पेयजल की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
सुरक्षा का ऐसा घेरा, पहचानना मुश्किल होगा कौन जवान-कौन श्रद्धालु
श्रावणी मेले में सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने इस बार खास रणनीति तैयार की है। भीड़ के बीच निगरानी के लिए कुछ मजिस्ट्रेट और पुलिसकर्मी श्रद्धालुओं के वेश में तैनात रहेंगे, ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत नजर रखी जा सके।
पूरे मेला क्षेत्र और कांवरिया पथ पर सुरक्षा के लिए 15 अस्थायी थाने बनाए गए हैं। करीब 4 हजार पुलिस जवान, दंडाधिकारी, होमगार्ड और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है।
इसके अलावा सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन और पहली बार लगाए गए हेड काउंट कैमरा और ऑटोमैटिक काउंटिंग सिस्टम से श्रद्धालुओं की संख्या और भीड़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी।
तीन दिन में 9 लाख शिवभक्तों ने उठाया जल
श्रावणी मेला उद्घाटन के बाद से शनिवार तक करीब तीन दिनों में लगभग 9 लाख श्रद्धालु उत्तरवाहिनी और नमामि गंगे घाट से गंगाजल लेकर देवघर के लिए निकल चुके हैं।
कांवरिया पथ पर रात में रोशनी के लिए हाईमास्ट और एलईडी लाइटें लगाई गई हैं। जगह-जगह विश्राम स्थल, चिकित्सा शिविर, एंबुलेंस और पेयजल की व्यवस्था की गई है।
टेंट सिटी से लेकर सस्ती भोजन व्यवस्था तक इंतजाम
दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए टेंट सिटी, स्विस कॉटेज, धर्मशाला और अस्थायी आवास की व्यवस्था की गई है। करीब 3 हजार श्रद्धालुओं के ठहरने की सुविधा तैयार की गई है।
वहीं जीविका दीदियों की ओर से कम कीमतों पर भोजन की व्यवस्था भी की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को परेशानी न हो।
प्रशासन की अग्निपरीक्षा, आस्था के सैलाब को संभालने की चुनौती
सुल्तानगंज से देवघर तक उमड़ने वाली लाखों की भीड़ प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती भी है। भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा के बीच तालमेल बनाना सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
लेकिन इस बार हाईटेक निगरानी, भेष बदलकर तैनात जवान और आधुनिक कैमरा सिस्टम के सहारे प्रशासन ने दावा किया है कि सावन की पहली सोमवारी पर श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम यात्रा का अनुभव मिलेगा।
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