पलामू: पलामू की जमीन अब सिर्फ खनिज संपदा के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की टेक्नोलॉजी की ताकत के लिए भी पहचानी जाएगी। जिले के सतबरवा प्रखंड में 12 मिलियन टन उच्च गुणवत्ता वाले ग्रेफाइट भंडार की पुष्टि हुई है। यह पलामू प्रमंडल में अब तक मिले सबसे बड़े ग्रेफाइट भंडारों में से एक है।
खामडीह और पूर्णाडीह के बीच मिले इस ग्रेफाइट भंडार का ग्रेड 7.7 प्रतिशत कार्बन वाला बताया जा रहा है। खनन विभाग के मुताबिक जनवरी-फरवरी में ड्रिलिंग के दौरान इसकी पुष्टि हुई थी, जिसके बाद डीजीपीएस सर्वे और डिमार्केशन का काम पूरा कर लिया गया है।
अब इसकी रिपोर्ट तैयार कर नीलामी के लिए केंद्र सरकार को भेजने की तैयारी है। नीलामी प्रक्रिया पूरी होने के बाद निजी कंपनियों के निवेश की संभावना बढ़ेगी, जिससे क्षेत्र में उद्योग और रोजगार के नए रास्ते खुल सकते हैं।
ग्रेफाइट की बढ़ती वैश्विक मांग के बीच पलामू का यह भंडार बेहद अहम माना जा रहा है। इसका इस्तेमाल लिथियम आयन बैटरी, इलेक्ट्रिक वाहन, परमाणु उद्योग, स्टील और आधुनिक तकनीक से जुड़े क्षेत्रों में किया जाता है।
वहीं, इलाके में बंद पड़ी पुरानी ग्रेफाइट माइंस को दोबारा शुरू करने की उम्मीद भी बढ़ गई है। खनन विभाग अन्य क्षेत्रों में भी सर्वे कर रहा है, ताकि और खनिज संपदा की तलाश की जा सके।
स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि अगर खनन शुरू होता है तो रोजगार, सड़क और बुनियादी सुविधाओं में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
पलामू का यह ग्रेफाइट भंडार सिर्फ खनन की कहानी नहीं, बल्कि झारखंड के औद्योगिक भविष्य की नई शुरुआत साबित हो सकता है।
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