गया: बहुचर्चित सुमीरक यादव हत्याकांड में 13 साल बाद आया कोर्ट का फैसला बिहार की सियासत में नई बहस छेड़ गया है। गया की अदालत ने सबूतों के अभाव में पूर्व राजद विधायक रणजीत यादव को बरी कर दिया। उनके साथ तीन अन्य आरोपियों—विवेक यादव, पंकज यादव और दीपू—को भी राहत मिली है।
एडीजे-3 अजित कुमार की अदालत ने स्पष्ट कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में असफल रहा। पुख्ता साक्ष्य न मिलने के कारण सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया।
यह मामला साल 2013 का है, जब अतरी विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई के बीच जदयू कार्यकर्ता सुमीरक यादव की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। बताया जाता है कि वे पार्टी कार्यालय से घर लौट रहे थे, तभी घात लगाए हमलावरों ने लाठी-डंडे और लोहे की रॉड से उन पर हमला कर दिया था।
इस हत्याकांड में तत्कालीन राजद विधायक कुंती देवी और उनके परिवार के कई सदस्यों का नाम सामने आया था। साल 2021 में कुंती देवी को दोषी ठहराते हुए अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी, लेकिन जेल में ही उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। वहीं, रणजीत यादव के पिता राजेंद्र यादव अब भी जेल में सजा काट रहे हैं।
पटना हाईकोर्ट के निर्देश पर इस मामले में रणजीत यादव के खिलाफ भी मुकदमा चला और लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अब अदालत ने उन्हें बरी कर दिया है।
13 साल तक चले इस हाई-प्रोफाइल केस के फैसले से एक तरफ पीड़ित परिवार निराश है, तो दूसरी ओर पूर्व विधायक के समर्थकों में खुशी का माहौल है। अदालत के इस फैसले ने एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया और राजनीतिक मामलों में सबूतों की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं।