जमशेदपुर: एक मोबाइल सिम कार्ड से शुरू हुई जांच अब करोड़ों रुपये की साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क तक पहुंच गई है। चंडीगढ़ के रिटायर्ड बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता से हुई 2 करोड़ रुपये की डिजिटल अरेस्ट ठगी मामले में सीबीआई ने जमशेदपुर में दस्तक दी है।
चंडीगढ़ सीबीआई की टीम ने झारखंड सीबीआई के सहयोग से गोलमुरी के टुईलाडूंगरी सरस्वती नगर में छापेमारी कर राजदीप सिंह को हिरासत में लिया। फिलहाल उससे गोलमुरी थाना में पूछताछ की जा रही है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, जिस मोबाइल सिम का इस्तेमाल साइबर अपराधियों ने ठगी के दौरान किया था, वह राजदीप सिंह उर्फ अर्जुन सिंह के नाम पर जारी था। इसी सुराग के आधार पर सीबीआई उसके घर तक पहुंची।
टीम ने राजदीप से आधार कार्ड, बैंक पासबुक और अन्य दस्तावेज लिए हैं। अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि सिम का इस्तेमाल खुद राजदीप ने किया था या उसके दस्तावेजों का किसी और ने गलत इस्तेमाल किया।
डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर उड़ाए 2 करोड़
मामला चंडीगढ़ के रिटायर्ड कार्यपालक अभियंता सुखमिंदर सिंह से जुड़ा है। साइबर अपराधियों ने उन्हें डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर अपने जाल में फंसाया और उनके खाते से करीब 2 करोड़ रुपये नौ बार में निकाल लिए।
जांच में पता चला कि ठगी की रकम को एक जगह नहीं रखा गया, बल्कि उसे करीब 60 अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। इससे सीबीआई को बड़े साइबर नेटवर्क की आशंका है।
जमशेदपुर में दूसरी टीम पहुंची, फिर बताई गलती
कार्रवाई के दौरान सीबीआई की दूसरी टीम टुईलाडूंगरी निवासी जसबीर सिंह के घर भी पहुंची। टीम ने वहां पूछताछ की, लेकिन बाद में अधिकारियों ने इसे गलतफहमी बताया।
फिलहाल सीबीआई इस बात की जांच कर रही है कि ठगी की रकम और इस्तेमाल हुए मोबाइल नंबरों का कनेक्शन किन-किन लोगों से जुड़ा है।
परिवार बोला- दस्तावेजों का हुआ गलत इस्तेमाल
वहीं राजदीप के परिवार ने उसे निर्दोष बताया है। उसकी मां बलजीत कौर का कहना है कि बेटे के आधार कार्ड और दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर उसे फंसाया गया है।
परिवार का दावा है कि राजदीप साधारण जीवन जीता है। वह पहले जोमैटो में डिलीवरी का काम करता था और वर्तमान में ड्राइवर का काम कर रहा है।
राजदीप के पिता पुरुषोत्तम शर्मा ने कहा कि अगर बेटा करोड़ों रुपये की ठगी में शामिल होता तो परिवार की आर्थिक हालत ऐसी नहीं होती।
अब सीबीआई बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, सिम कार्ड और दस्तावेजों की जांच कर यह पता लगाने में जुटी है कि 2 करोड़ की ठगी के पीछे असली खिलाड़ी कौन हैं और राजदीप की भूमिका क्या है।