रांची: झारखंड में सामने आए ट्रेजरी घोटाले की जांच अब और तेज हो गई है। अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने खूंटी और देवघर जिले में सरकारी राशि की अवैध निकासी से जुड़े मामलों को अपने हाथ में ले लिया है। दोनों मामलों में CID थाना रांची में 13 जुलाई को प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
इन दोनों नए मामलों के जुड़ने के बाद ट्रेजरी घोटाले से जुड़े CID के पास अब कुल सात केस दर्ज हो चुके हैं। जांच एजेंसी सरकारी राशि की निकासी, फर्जी प्रक्रिया, बैंक खातों में ट्रांसफर और इसमें शामिल अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रही है।
खूंटी जिले के सारिदकेल तोरपा स्थित एसआईआरबी-02 वाहिनी मुख्यालय की लेखा शाखा में करीब 22.69 लाख रुपये की अवैध निकासी का मामला सामने आया है। जांच में पाया गया कि नियमों को ताक पर रखकर सरकारी राशि को निजी खातों में ट्रांसफर किया गया। इस मामले में अकाउंटेंट अजीत कुमार सिंह और शुभम सिंह को आरोपी बनाया गया है।
मामले में शुभम सिंह को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। उसे पटना के बिहटा क्षेत्र से 19 जून को पकड़ा गया था। वहीं दूसरा आरोपी अजीत कुमार सिंह अभी फरार है। अब CID की एसआईटी गिरफ्तार आरोपी को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
वहीं देवघर जिले के सरवां स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में करीब 99 लाख रुपये की अवैध वेतन निकासी का मामला सामने आया है। आरोप है कि वर्ष 2017 से 2019 के बीच तत्कालीन लेखा लिपिक सविता कुमारी ने ट्रेजरी से गलत तरीके से राशि निकाली।
जांच के अनुसार, अलग-अलग कर्मचारियों के नाम पर राशि ट्रांसफर कर कई खातों में भेजी गई। मामले की जांच के बाद देवघर प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर सरवां थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अब CID इस मामले की वित्तीय कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
ट्रेजरी घोटाले में CID पहले से ही हजारीबाग, बोकारो, चाईबासा, रांची और रामगढ़ के मामलों की जांच कर रही है। इनमें हजारीबाग एसपी कार्यालय से करीब 31 करोड़ रुपये, बोकारो एसपी कार्यालय से करीब 11 करोड़ रुपये और रांची पशुपालन विभाग से करीब 2.94 करोड़ रुपये की अवैध निकासी के मामले शामिल हैं।
इसके अलावा रामगढ़ पशुपालन विभाग से 34.25 लाख रुपये और चाईबासा एसपी कार्यालय से 44 लाख रुपये की गड़बड़ी की भी जांच चल रही है। हजारीबाग और बोकारो मामलों में CID कई आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
इस पूरे मामले में CID के साथ-साथ वित्त विभाग की विशेष टीम भी जांच कर रही है। वहीं प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी ECIR दर्ज कर प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है।
करोड़ों रुपये की सरकारी राशि में हुई गड़बड़ी की जांच अब राज्य के सबसे बड़े वित्तीय मामलों में शामिल हो गई है। CID यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी खजाने से निकली रकम कहां-कहां पहुंची और इस पूरे खेल में कौन-कौन लोग शामिल हैं।