शेखपुरा: जिले के भोजडीह रोड स्थित एक निजी अस्पताल में कथित गलत ऑपरेशन के दौरान गर्भवती महिला की मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों ने इसे साफ तौर पर लापरवाही का मामला बताते हुए अस्पताल प्रबंधन, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन पर मिलीभगत तक के आरोप लगाए हैं।
परिजनों का कहना है कि एक आशा कार्यकर्ता उन्हें इस निजी अस्पताल में लेकर आई, जहां ऑपरेशन के दौरान महिला की हालत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। आरोप है कि इलाज के नाम पर करीब 51 हजार रुपये वसूले गए, लेकिन समय पर सही उपचार नहीं दिया गया। घटना के बाद गुस्साए परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। बताया जा रहा है कि स्थिति बिगड़ती देख डॉक्टर और कर्मी अस्पताल बंद कर मौके से फरार हो गए।

इस घटना ने एक बार फिर जिले में चल रहे निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना पर्याप्त संसाधन और विशेषज्ञता के कई अस्पताल धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रभावी निगरानी नहीं की जा रही। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब हाल ही में आसपास के एक अस्पताल पर कार्रवाई की गई थी, तो फिर ऐसे संस्थान अब तक कैसे चल रहे थे।
मामले पर जिलाधिकारी शेखर आनंद ने जांच की बात कही है, लेकिन घटना के एक सप्ताह बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि जांच के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही है और दोषियों को बचाने की कोशिश हो रही है।
स्वास्थ्य विभाग की भूमिका भी कटघरे में है। आरोप है कि निगरानी तंत्र पूरी तरह विफल साबित हो रहा है, जिसके कारण आम लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले में सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल है और गरीबों को निजी अस्पतालों के भरोसे छोड़ दिया गया है।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी डॉक्टरों और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही जिले में संचालित सभी निजी अस्पतालों की व्यापक जांच कराई जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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