पटना/राजगीर(बिहार): बिहार अब खेल के मैदान में नया इतिहास लिख रहा है। राजगीर खेल अकादमी में 18 और 19 जून को आयोजित दो दिवसीय “स्पोर्ट्स साइंस वर्कशॉप 2026” ने राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। खास बात यह है कि प्रशिक्षकों के लिए इस तरह की स्पोर्ट्स साइंस वर्कशॉप आयोजित करने वाला बिहार देश का पहला राज्य बन गया है।
बिहार राज्य खेल प्राधिकरण की पहल पर आयोजित इस वर्कशॉप में देशभर के शीर्ष खेल विज्ञान विशेषज्ञ खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को आधुनिक तकनीक और साइंटिफिक ट्रेनिंग के गुर सिखा रहे हैं। रोजाना सुबह 10:30 बजे से शाम 5:15 बजे तक चलने वाले इस सत्र में खेल को नए नजरिए से समझाया जा रहा है।
पहले दिन “एथलीट हेल्थ, रिकवरी और ह्यूमन परफॉर्मेंस” पर गहन चर्चा हुई, जिसमें विशेषज्ञों ने बताया कि अब सिर्फ मेहनत नहीं, बल्कि वैज्ञानिक प्रशिक्षण ही खिलाड़ियों को चैंपियन बनाता है। वहीं दूसरे दिन “परफॉर्मेंस ऑप्टिमाइजेशन और हाई-परफॉर्मेंस साइंस” पर फोकस किया जाएगा।
SAI के स्पोर्ट्स साइंस एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ब्रिगेडियर (डॉ.) बिभु कल्याण नायक ने अपने संबोधन में कहा कि स्पोर्ट्स साइंस आज के दौर में एथलीट्स के लिए रीढ़ की हड्डी बन चुका है, जो प्रदर्शन को बेहतर बनाने के साथ-साथ चोटों से भी बचाता है।
डॉ. पूर्णिमा रमन ने फिजियोथेरेपी के जरिए चोट से बचाव और रिकवरी के महत्व को समझाया, वहीं डॉ. आराधना शर्मा ने खिलाड़ियों के लिए सही न्यूट्रिशन की भूमिका पर जोर दिया। डॉ. शुभ्रा चटर्जी ने एक्सरसाइज फिजियोलॉजी और उभरते ट्रेंड्स के जरिए खिलाड़ियों की परफॉर्मेंस बढ़ाने के तरीके बताए।
दूसरे दिन भी देश के नामी विशेषज्ञ खिलाड़ियों को हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनिंग, स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग, साइकोलॉजी और बायोमैकेनिक्स के आधुनिक पहलुओं से रूबरू कराएंगे।
खेल विभाग और बिहार राज्य खेल प्राधिकरण का मानना है कि इस तरह की वैज्ञानिक ट्रेनिंग से राज्य के खिलाड़ी अब राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी दमदार प्रदर्शन करेंगे। यह वर्कशॉप खिलाड़ियों और कोचों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है।
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