शिवहर: तिरहुत प्रमंडल के शिवहर में स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। राष्ट्रीय राजमार्ग 227 पर फतेहपुर के पास हुए सड़क हादसे के बाद घायल दरोगा श्यामलाल के इलाज ने सरकारी सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है।
गंभीर रूप से घायल दरोगा को सरोजा सीताराम सदर अस्पताल लाया गया, लेकिन यहां इलाज का जो ‘नजारा’ सामने आया, उसने हर किसी को हैरान कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, टूटे हुए पैर को स्थिर करने के लिए डॉक्टरों ने आधुनिक चिकित्सा उपकरणों के बजाय कार्टून और पानी चढ़ाने वाले पाइप का सहारा लिया।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यही है ‘बेहतर स्वास्थ्य सेवा’ का दावा? जब एक पुलिस अधिकारी के इलाज में इस तरह का जुगाड़ अपनाया जा रहा है, तो आम जनता के हिस्से क्या आता होगा?
घटना की खबर मिलते ही कई पुलिस अधिकारी अस्पताल पहुंचे और हालात का जायजा लिया। मौके पर मौजूद लोगों ने साफ कहा कि यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की सच्चाई है। अस्पताल में बुनियादी संसाधनों की कमी इतनी गहरी है कि इलाज भी ‘इनोवेशन’ के नाम पर जुगाड़ से चल रहा है।
हालांकि सिविल सर्जन डॉ. दीपक कुमार ने सफाई देते हुए कहा कि मरीज का पैर कई हिस्सों में टूट चुका था और बिना ऑपरेशन प्लास्टर संभव नहीं था। इसलिए तत्काल राहत देने के लिए अस्थायी व्यवस्था की गई। बाद में मरीज को बेहतर इलाज के लिए सीतामढ़ी रेफर कर दिया गया।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था अभी भी ‘जुगाड़’ के सहारे ही चल रही है?
सरकार के बड़े-बड़े दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई इस घटना ने साफ कर दी है। अब देखना होगा कि यह मामला सिर्फ खबर बनकर रह जाता है या सिस्टम में सच में कोई सुधार होता है।
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शिवहर से अजय मिलन की रिपोर्ट…