नई दिल्ली/पटना/लखनऊ/बेंगलुरु: देश के चार राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और महाराष्ट्र की विधान परिषद की 28 सीटों पर हुए चुनाव ने कई राजनीतिक समीकरणों को चर्चा में ला दिया है। 28 अक्टूबर 2026 को मतगणना के दौरान बिहार में बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जहां राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के डॉ. संजीव कुमार ने भाजपा के वरिष्ठ नेता और पांच बार के एमएलसी नवल किशोर यादव को पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से हरा दिया। वहीं, दरभंगा शिक्षक सीट पर जन सुराज के सुरेश प्रसाद राय ने जीत दर्ज कर पार्टी को विधान परिषद में पहली सफलता दिलाई।
कर्नाटक में भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) यानी जेडीएस के गठबंधन ने सभी चार सीटों पर जीत हासिल की। उत्तर प्रदेश में भाजपा ने कई सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव ने जीत हासिल की। महाराष्ट्र में पांच सीटों पर मतगणना जारी रहने के दौरान सत्तारूढ़ महायुति और विपक्षी महाविकास अघाड़ी के बीच मुकाबला बना हुआ था।
बिहार में सबसे बड़ा उलटफेर, नवल किशोर यादव की हार
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए चुनाव हुआ था। इनमें चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के परिणाम सामने आने पर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई। पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में आरजेडी के डॉ. संजीव कुमार ने भाजपा के नवल किशोर यादव को 1,057 मतों से पराजित किया।
डॉ. संजीव कुमार को कुल 4,487 वोट मिले, जबकि नवल किशोर यादव को 3,430 वोट प्राप्त हुए। इस जीत के साथ पटना शिक्षक सीट पर नवल किशोर यादव का करीब तीन दशक पुराना चुनावी वर्चस्व समाप्त हो गया। वह इससे पहले लगातार पांच बार इस सीट से जीत दर्ज कर चुके थे।
यह परिणाम भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में पार्टी लंबे समय से मजबूत स्थिति में रही थी। इस बार आरजेडी ने सीट पर कब्जा जमाकर मुकाबले का समीकरण बदल दिया।
दरभंगा में जन सुराज की पहली सफलता
दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जन सुराज पार्टी के सुरेश प्रसाद राय ने जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और दो बार के एमएलसी मदन मोहन झा को हराया। इस परिणाम के साथ जन सुराज को बिहार विधान परिषद में पहली सफलता मिली।
प्रशांत किशोर की पार्टी के लिए यह परिणाम संगठनात्मक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दरभंगा की जीत से पार्टी को शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का अवसर मिला।
तिरहुत में भाजपा और सारण में निर्दलीय उम्मीदवार की जीत
तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के नरेंद्र प्रसाद सिंह ने जीत दर्ज की। उन्होंने निवर्तमान एमएलसी और सीपीआई नेता संजय सिंह को हराया। इस सीट पर भाजपा की जीत ने बिहार में पार्टी के लिए राहत की खबर दी।
वहीं, सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के बागी उम्मीदवार और निर्दलीय प्रत्याशी डॉ. राहुल राज ने जीत हासिल की। इस तरह चार शिक्षक सीटों के घोषित परिणामों में भाजपा, आरजेडी, जन सुराज और निर्दलीय प्रत्याशी ने एक-एक सीट अपने नाम की।
बिहार की शेष चार सीटें स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की थीं। 28 अक्टूबर को उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इन सीटों पर मतगणना जारी थी और कुछ जगहों पर पहली वरीयता के बाद दूसरी वरीयता के मतों की गिनती महत्वपूर्ण बनी हुई थी। इसलिए सभी आठ सीटों का अंतिम परिणाम एक साथ घोषित मानना उचित नहीं होगा।
उत्तर प्रदेश में भाजपा को बढ़त, वाराणसी में सपा की जीत
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के लिए चुनाव हुआ। इनमें पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल थे। मतगणना के दौरान भाजपा ने कई सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि समाजवादी पार्टी ने वाराणसी शिक्षक सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा।
वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से सपा के लाल बिहारी यादव ने भाजपा के डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा को हराया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, लाल बिहारी यादव को 10,958 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी को 6,060 वोट प्राप्त हुए। जीत का अंतर करीब 4,900 मत रहा। वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के कारण इस परिणाम पर राजनीतिक चर्चा भी तेज हुई।
भाजपा ने मेरठ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से दिनेश कुमार गोयल, मेरठ शिक्षक सीट से श्रीचंद शर्मा, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक सीट से डॉ. हरि सिंह ढिल्लों और लखनऊ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से उमेश द्विवेदी की जीत के साथ अपनी स्थिति मजबूत की।
आगरा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सपा प्रत्याशी डॉ. आकाश अग्रवाल की जीत भी सामने आई। हालांकि, मतगणना के दौरान कुछ अन्य सीटों पर मुकाबला जारी था। गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के ध्रुव त्रिपाठी और निर्दलीय प्रत्याशी राजीव यादव के बीच कड़ी टक्कर की खबरें आईं। ऐसे में मतगणना के दौरान जारी रुझानों को अंतिम नतीजे से अलग समझना जरूरी है।
कर्नाटक में NDA का क्लीन स्वीप, कांग्रेस चारों सीटों पर हारी
कर्नाटक में भाजपा-जेडीएस गठबंधन ने विधान परिषद की चारों सीटों पर जीत दर्ज की। इनमें भाजपा ने तीन सीटें जीतीं, जबकि जेडीएस ने एक सीट पर कब्जा जमाया। राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस के लिए यह बड़ा चुनावी झटका रहा, क्योंकि पार्टी चारों सीटों पर हार गई।
बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा समर्थित जेडीएस उम्मीदवार एपी रंगनाथ ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और निवर्तमान एमएलसी पुट्टन्ना को 908 वोटों से हराया। रंगनाथ को 10,810 मत मिले, जबकि पुट्टन्ना को 9,902 वोट प्राप्त हुए। इस जीत के साथ जेडीएस ने कांग्रेस से यह सीट छीन ली।
उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के शशिल जी. नामोशी ने कांग्रेस उम्मीदवार शरणप्पा मत्तूर को 3,297 मतों से पराजित किया। नामोशी को 15,596 वोट मिले, जबकि मत्तूर को 12,299 मत प्राप्त हुए। रिपोर्टों के अनुसार, नामोशी ने इस निर्वाचन क्षेत्र से पांचवीं बार जीत दर्ज की।
दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के के.एम. सुरेश ने कांग्रेस उम्मीदवार शशि हुलिकुंते मठ को हराया। पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के एस.वी. संकनूर ने जीत हासिल की। इन परिणामों के साथ भाजपा-जेडीएस गठबंधन ने सभी चार सीटें अपने नाम कर लीं।
महाराष्ट्र में पांच सीटों पर मुकाबला जारी
महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों पर मतगणना जारी रहने के दौरान सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन तीन सीटों पर आगे था, जबकि विपक्षी महाविकास अघाड़ी दो सीटों पर बढ़त बनाए हुए थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, भाजपा पुणे शिक्षक और नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में आगे थी, जबकि अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में शिवसेना की बढ़त की खबर थी।
इन सीटों पर अंतिम परिणाम घोषित होने से पहले किसी गठबंधन की बढ़त को जीत के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा। मतगणना पूरी होने और निर्वाचन अधिकारियों की घोषणा के बाद ही महाराष्ट्र की पांचों सीटों की अंतिम तस्वीर स्पष्ट होगी।
बैलेट पेपर से हुआ मतदान, भाजपा ने कांग्रेस पर साधा निशाना
इन विधान परिषद चुनावों में मतदान बैलेट पेपर के जरिए कराया गया था। कर्नाटक में भाजपा-जेडीएस गठबंधन की जीत के बाद भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर निशाना साधा। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने चुनाव परिणामों को कांग्रेस के लिए राजनीतिक झटका बताते हुए कहा कि पार्टी को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला।
यह भाजपा की राजनीतिक प्रतिक्रिया थी। चुनाव परिणामों से संबंधित दावों और नेताओं की टिप्पणियों को अलग-अलग समझना जरूरी है। चार राज्यों के नतीजे शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में दर्ज मतदान का परिणाम हैं; इन्हें सीधे विधानसभा चुनावों के संभावित नतीजों का संकेत मानना उचित नहीं होगा।
चार राज्यों के नतीजों से क्या तस्वीर उभरी?
28 अक्टूबर को उपलब्ध परिणामों में कर्नाटक में भाजपा-जेडीएस गठबंधन की चारों सीटों पर जीत सबसे स्पष्ट नतीजा रहा। बिहार में पटना शिक्षक सीट पर आरजेडी की जीत और दरभंगा में जन सुराज की सफलता ने मुकाबले को दिलचस्प बनाया। उत्तर प्रदेश में भाजपा ने कई सीटों पर जीत दर्ज की, लेकिन वाराणसी शिक्षक सीट पर सपा ने अपना प्रभाव बनाए रखा। महाराष्ट्र में मतगणना जारी रहने से अंतिम तस्वीर का इंतजार था।
कुल मिलाकर, इन चुनावों में अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक दलों को सफलता मिली। बिहार और कर्नाटक के परिणाम खास तौर पर चर्चा में रहे, जबकि उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की कुछ सीटों पर अंतिम नतीजों के लिए मतगणना पूरी होने का इंतजार करना जरूरी था।
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