लखीसराय: राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की जयंती के अवसर पर 23 सितंबर को लखीसराय में साहित्य और कविता का खास रंग देखने को मिलेगा। शहर के पुरानी बाजार, बड़ी पोखर स्थित प्रज्ञा विद्या विहार पब्लिक स्कूल परिसर में जयंती समारोह-सह-कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। सुबह 11 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक चलने वाले इस आयोजन में स्थानीय कवियों के साथ बिहार के विभिन्न जिलों से पहुंचे रचनाकार अपनी कविताओं के माध्यम से साहित्य प्रेमियों से संवाद करेंगे।
वीर रस से हास्य-व्यंग्य तक दिखेगा कविता का विविध रंग
दिनकर की साहित्यिक परंपरा को याद करते हुए आयोजित होने वाले कवि सम्मेलन में कविता की अलग-अलग विधाओं और भावों की प्रस्तुतियां होंगी। वीर रस के साथ हास्य-व्यंग्य, श्रृंगार, गीत, गजल, जनवादी और प्रकृति से जुड़ी रचनाओं के माध्यम से कवि अपनी रचनात्मकता प्रस्तुत करेंगे। कार्यक्रम में मगही भाषा की रचनाओं और नाट्य प्रस्तुतियों को भी स्थान दिया गया है।
कवि सम्मेलन में डॉ. नूतन सिंह, नरेंद्र प्रसाद सिंह, उदय शंकर शर्मा, उमेश बहादुरपुरी, दशरथ महतो, प्रो. राजेंद्र राज, दयाशंकर सिंह ‘बेधड़क’, उमेश प्रसाद उमेश, मुद्रिका प्रसाद सिंह, भोला पंडित, गौतम कुमार ‘सरगम’, सुरेंद्र कुमार सिद्धार्थ, रंजीत ‘दुधू’, जितेंद्र चैतन्य, कृष्ण कुमार ‘भट्टा’, आनंद शंकर, अभिमन्यु प्रजापति और ओमप्रकाश स्नेही सहित कई कवि अपनी रचनाएं प्रस्तुत करेंगे।
छात्रों को भी मिलेगा कविता पाठ का मंच
इस आयोजन की खास बात यह होगी कि प्रज्ञा विद्या विहार पब्लिक स्कूल के छात्र-छात्राओं को भी मंच पर अपनी कविताएं प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। इससे विद्यार्थियों को न केवल कविता सुनने का मौका मिलेगा, बल्कि वे स्वयं भी साहित्यिक मंच का अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।
विद्यालय के निदेशक रंजन कुमार ने बताया कि कार्यक्रम में पटना, बाढ़, नवादा, नालंदा, शेखपुरा, जमुई, बरबीघा, सूर्यगढ़ा और लखीसराय सहित विभिन्न क्षेत्रों से उभरते कवि और साहित्यकार शामिल होंगे। उनका कहना है कि ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों को साहित्य की विभिन्न विधाओं को करीब से समझने और रचनात्मक अभिव्यक्ति का अवसर मिलता है।
दिनकर की साहित्यिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की पहल
कार्यक्रम का संयोजन ‘संझाबाती’ पत्रिका के संपादक हेमंत कुमार कर रहे हैं। आयोजकों के अनुसार, कवि सम्मेलन का उद्देश्य राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के साहित्यिक योगदान को याद करने के साथ स्थानीय और उभरती प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराना भी है।
दिनकर की जयंती पर आयोजित यह साहित्यिक कार्यक्रम जिले के साहित्य प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहेगा। आयोजन को लेकर विद्यालय परिवार और स्थानीय साहित्यिक जगत में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। कवियों की विविध प्रस्तुतियों और विद्यार्थियों की सहभागिता से कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और नई पीढ़ी का संगम देखने को मिलेगा।
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