लखीसराय: जिले के बड़हिया प्रखंड अंतर्गत दरियापुर गांव के होनहार युवा डॉ. रवि सिंह ने अपनी शैक्षणिक उपलब्धि से पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है। दिलीप कुमार के पुत्र और स्वर्गीय रामपुजन सिंह के पौत्र डॉ. रवि सिंह का चयन सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर के प्रतिष्ठित पद पर हुआ है। उनकी इस सफलता से परिवार, गांव और जिले में खुशी का माहौल है। ग्रामीण परिवेश से निकलकर उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने वाले डॉ. रवि सिंह की यह उपलब्धि युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।
डॉ. रवि सिंह की सफलता केवल एक नौकरी हासिल करने की कहानी नहीं है, बल्कि निरंतर मेहनत, शिक्षा के प्रति समर्पण और पारिवारिक संस्कारों की मजबूत नींव का परिणाम है। उनकी शैक्षणिक यात्रा प्राथमिक विद्यालय दरियापुर से शुरू हुई। इसके बाद उन्होंने सैनिक स्कूल कपूरथला में दसवीं तक की शिक्षा प्राप्त की। आगे की पढ़ाई बिहार बोर्ड से बारहवीं कक्षा में पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार का रुख किया, जहां से स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर अपने अकादमिक सफर को नई ऊंचाई दी।
वर्तमान में डॉ. रवि सिंह समस्तीपुर जिले के हसनपुर स्थित +2 हाई स्कूल में शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। विद्यालय में शिक्षण कार्य के साथ उन्होंने उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में अपनी निरंतरता बनाए रखी। अब सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर उनका चयन उनके लंबे शैक्षणिक परिश्रम और प्रतिभा की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
स्व. रामपुजन सिंह की सोच और संस्कारों ने रखी सफलता की नींव
डॉ. रवि सिंह की इस उपलब्धि के पीछे उनके परिवार की शिक्षा के प्रति गहरी प्रतिबद्धता और स्वर्गीय रामपुजन सिंह की दूरदर्शी सोच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परिवार में शिक्षा को केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को बेहतर बनाने और समाज में योगदान देने का संस्कार माना गया है।
स्वर्गीय रामपुजन सिंह ने परिवार में शिक्षा, अनुशासन और अच्छे संस्कारों का जो वातावरण तैयार किया, उसका प्रभाव आज नई पीढ़ी की उपलब्धियों में दिखाई दे रहा है। डॉ. रवि सिंह की सफलता उसी गौरवशाली परंपरा की एक नई कड़ी है। परिवार के सदस्यों का मानना है कि उनके पूर्वजों की प्रेरणा और शिक्षा के प्रति विश्वास ने आने वाली पीढ़ियों को आगे बढ़ने का हौसला दिया।
परिवार में शिक्षा और उत्कृष्टता की मजबूत परंपरा
डॉ. रवि सिंह का परिवार शिक्षा और पेशेवर उपलब्धियों के मामले में भी एक प्रेरणादायक उदाहरण है। उनकी बड़ी बहन डॉक्टर हैं, जबकि उनके तीन भाई इंजीनियरिंग के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। परिवार के सदस्यों ने अलग-अलग प्रतिष्ठित क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई है।
ऐसे परिवार में डॉ. रवि सिंह का विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर चयन शिक्षा के प्रति पीढ़ियों से चली आ रही प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है। यह उपलब्धि बताती है कि सही मार्गदर्शन, पारिवारिक सहयोग, अनुशासन और निरंतर मेहनत से ग्रामीण क्षेत्र के युवा भी उच्च शिक्षा और प्रतिष्ठित संस्थानों तक अपनी जगह बना सकते हैं।
दरियापुर से विश्वविद्यालय तक का सफर बना युवाओं के लिए मिसाल
प्राथमिक विद्यालय दरियापुर से अपनी पढ़ाई शुरू करने वाले रवि सिंह ने सैनिक स्कूल, विश्वविद्यालय और शोध के विभिन्न पड़ावों को पार करते हुए यह मुकाम हासिल किया है। उनकी यात्रा गांव के उन विद्यार्थियों के लिए विशेष संदेश देती है, जो सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखते हैं।
डॉ. रवि सिंह का चयन न केवल उनके परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि बड़हिया प्रखंड और लखीसराय जिले के लिए भी गौरवपूर्ण उपलब्धि है। उनकी सफलता से क्षेत्र के विद्यार्थियों को शिक्षा के प्रति गंभीरता, निरंतर प्रयास और लक्ष्य के प्रति समर्पण की प्रेरणा मिलेगी।
इस उपलब्धि पर डॉ. रवि सिंह को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी जा रही हैं। उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि वे विश्वविद्यालय में अपने ज्ञान, अनुभव और शिक्षण क्षमता से विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
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