लखीसराय: प्रभात फेरी की जोशभरी शुरुआत, विकास प्रदर्शनी की झलक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की रंगीन छटा—कुछ इसी अंदाज में लखीसराय में बिहार दिवस 2026 का आगाज हुआ। रविवार को स्थानीय नगर भवन में तीन दिवसीय समारोह का उद्घाटन जिले के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने दीप प्रज्वलित कर किया, लेकिन इस आयोजन की खास बात इसकी बहुरंगी प्रस्तुति रही, जिसने इसे सिर्फ सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि जनउत्सव बना दिया।

सुबह की शुरुआत समाहरणालय से लाली पहाड़ी तक निकली प्रभात फेरी से हुई, जिसमें स्कूली छात्र-छात्राएं, शिक्षक और विभिन्न विभागों के अधिकारी पूरे उत्साह के साथ शामिल हुए। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए बच्चों ने न सिर्फ जागरूकता फैलाई, बल्कि पूरे शहर में बिहार दिवस का उत्साह भी भर दिया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण केआरके हाई स्कूल मैदान में सजा विकास मेला रहा, जहां विभिन्न विभागों के स्टॉल लोगों को अपनी ओर खींचते नजर आए। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं को एक ही जगह देखने का मौका मिला। अधिकारियों और अतिथियों ने स्टॉलों का निरीक्षण कर जिले में हो रहे विकास कार्यों की जानकारी ली।

जिला पदाधिकारी मिथिलेश मिश्र ने अपने संबोधन में बिहार के गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को रेखांकित करते हुए कहा कि बिहार दिवस हमारी पहचान और भविष्य के संकल्प का प्रतीक है। वहीं जिला परिषद अध्यक्ष अंशु कुमारी ने विकास कार्यों में जनसहभागिता की अहम भूमिका को सराहा। विधायक रामानंद मंडल और नगर परिषद सभापति अरविंद पासवान ने भी सरकार की योजनाओं और उनके जमीनी प्रभावों को विस्तार से बताया। मौके पर वेद ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंन के निदेशक डॉ.ओम प्रकाश सहित अन्य गणमान्य लोगों की उपस्थिति रही।

इस मौके पर जिले की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को दर्शाने वाले टेबल कैलेंडर का विमोचन भी किया गया, जिसने स्थानीय पहचान को एक नई पहचान देने का प्रयास किया।

शाम होते-होते कार्यक्रम का रंग पूरी तरह सांस्कृतिक हो गया। स्थानीय कलाकारों और स्कूली बच्चों ने नृत्य, गीत और नाटक की शानदार प्रस्तुतियों से माहौल को जीवंत कर दिया। समूह लोक गायन, रंगोली, पेंटिंग और मूर्ति कला प्रतियोगिताओं ने प्रतिभागियों की रचनात्मकता को मंच दिया, जहां हर प्रस्तुति में बिहार की मिट्टी की खुशबू साफ महसूस हुई।

पूरे आयोजन में प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और आम लोगों की सक्रिय भागीदारी ने इसे खास बना दिया। यह सिर्फ एक समारोह नहीं, बल्कि लखीसराय की पहचान, विकास और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उत्सव बनकर उभरा, जिसने यह संदेश दिया कि बिहार सिर्फ इतिहास नहीं, बल्कि संभावनाओं का प्रदेश भी है।
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