भोजपुर: भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में अब कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। बिलौटी गांव में 17 जून 2026 को हुई मुठभेड़ को लेकर उठे सवालों के बीच बिहार सरकार ने न्यायिक जांच आयोग के सामने अपना पक्ष मजबूती से रखने की तैयारी शुरू कर दी है। गृह विभाग ने मामले की पैरवी के लिए विशेष लोक अभियोजकों और सहायक अधिवक्ताओं की नियुक्ति कर दी है।
सरकार की ओर से न्यायिक जांच आयोग के समक्ष पक्ष रखने के लिए कृष्ण मुरारी प्रसाद को विशेष लोक अभियोजक बनाया गया है, जबकि अनिल कुमार सिंह को सहायक अधिवक्ता नियुक्त किया गया है। इनके सहयोग के लिए अंजनी पराशर को भी जिम्मेदारी दी गई है।
वहीं, जांच आयोग की सहायता के लिए विनोद जी वर्मा को विशेष लोक अभियोजक और पारितोष लाल को सहायक अधिवक्ता नियुक्त किया गया है। गृह विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद बढ़ी हलचल
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में पटना हाईकोर्ट पहले ही राज्य सरकार से जवाब मांग चुका है। मृतक की मां आशा देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार को तीन सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए घटना से जुड़े अहम साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का भी आदेश दिया है। इसमें घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, वीडियोग्राफी, पुलिस वायरलेस लॉगबुक और मोबाइल डेटा जैसे महत्वपूर्ण रिकॉर्ड शामिल हैं।
अब जांच आयोग के सामने होगी असली परीक्षा
विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति के बाद अब न्यायिक जांच आयोग के सामने सरकारी पक्ष कानूनी तथ्यों के साथ अपनी दलील रखेगा। वहीं, हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद जांच में जुटे अधिकारियों पर भी पारदर्शिता बनाए रखने की जिम्मेदारी बढ़ गई है।
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में अब हर साक्ष्य और हर बयान अहम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में न्यायिक जांच आयोग की कार्रवाई से इस मामले की दिशा और दशा तय हो सकती है।
ये खबर भी पढ़े: Bihar: पुल बना, लेकिन रास्ता गायब, मीरगंज में जनता का फूटा गुस्सा, प्रशासन के खिलाफ सड़क पर उतरे सैकड़ों लोग!