पटना: बांकीपुर उपचुनाव से पहले राजधानी पटना की सड़कों पर सियासी पारा हाई हो गया है। जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर को निशाने पर लेते हुए एक विवादित पोस्टर सामने आया है, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
पोस्टर में तीखा हमला करते हुए लिखा गया है—केसी सिन्हा तो सिर्फ झांकी हैं, जमानत जब्त होना अभी बाकी है… इनको वोट नहीं, नोट चाहिए। नीचे लिखा है— “सौजन्य: बांकीपुर की जनता”
पोस्टर में प्रशांत किशोर को टोपी और गमछा पहने दिखाया गया है, जिसे लेकर अब अलग-अलग तरह की राजनीतिक व्याख्याएं की जा रही हैं।
जनसुराज को ‘धनसुराज’ बताने की कोशिश?
इस पोस्टर को लेकर चर्चा है कि यह सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि जनसुराज अभियान की छवि पर सीधा हमला है। विरोधी खेमे इसे “धनसुराज” बताकर यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि यह आंदोलन आम जनता का नहीं, बल्कि पैसे की राजनीति से जुड़ा है।
केसी सिन्हा के BJP में जाने से बढ़ी हलचल
इसी बीच जनसुराज को बड़ा झटका देते हुए प्रो. केसी सिन्हा भाजपा में शामिल हो गए। उनके साथ कई अन्य नेता और कार्यकर्ता भी पार्टी में चले गए, जिससे उपचुनाव से पहले जनसुराज की स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं।
पूर्व सहयोगियों ने ही खोला मोर्चा
भाजपा में शामिल होने के बाद जनसुराज के पूर्व नेताओं ने भी प्रशांत किशोर पर जमकर हमला बोला।
दीघा से पूर्व प्रत्याशी बिट्टू सिंह ने साफ कहा—अब बीजेपी छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे, जीना यहां, मरना यहां।
वहीं, गोपाल सिंह ने आरोप लगाया कि अहंकारी व्यक्ति संगठन नहीं चला सकता, प्रशांत किशोर के पास कोई विजन नहीं है।
बांकीपुर बना सियासी रणक्षेत्र
बांकीपुर उपचुनाव अब सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि इमेज और अस्तित्व की लड़ाई बनता जा रहा है।
एक तरफ जनसुराज अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटा है, तो दूसरी ओर विरोधी लगातार हमलावर हैं।
पोस्टर से शुरू हुई लड़ाई, असर दूर तक
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इस तरह के पोस्टर वार चुनावी माहौल को और ज्यादा आक्रामक बना सकते हैं।
यह सिर्फ एक पोस्टर नहीं, बल्कि आने वाले दिनों में तीखे आरोप-प्रत्यारोप की शुरुआत माना जा रहा है।
फिलहाल पटना की दीवारों पर लगा एक पोस्टर साफ इशारा दे रहा है—बांकीपुर में चुनाव से पहले सियासत अब पूरी तरह ‘हाई वोल्टेज’ मोड में पहुंच चुकी है।