किशनगंज: बिहार की राजनीति में एक बयान ने आग लगा दी है। किशनगंज से कांग्रेस सांसद डॉ जावेद आजाद ने संस्कृत भाषा को “विदेशी” बताकर ऐसा विवाद खड़ा कर दिया है, जिस पर अब चारों ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
टाउन हॉल के बाहर आयोजित धरना कार्यक्रम में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, हिंदी और उर्दू भारतीय भाषाएं हैं, जबकि अंग्रेजी और संस्कृत विदेशी भाषा हैं। बस, इसी बयान के बाद सियासी पारा चढ़ गया।
उर्दू बनाम संस्कृत की बहस तेज
उर्दू शिक्षकों की बहाली के सवाल पर सांसद ने कहा कि उर्दू हिंदुस्तानियों की जुबान है और इसे खत्म नहीं होने देंगे।
लेकिन संस्कृत को बाहरी भाषा बताने वाले उनके बयान ने भाषा और इतिहास दोनों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है।
विपक्ष हमलावर, सोशल मीडिया पर घमासान
सांसद के इस बयान के बाद विरोधी दलों ने मोर्चा खोल दिया है। कई नेताओं ने इसे “इतिहास और संस्कृति का अपमान” बताया है, तो कुछ ने उनके बयान को “ज्ञान की कमी” करार दिया है। सोशल मीडिया पर भी लोग दो खेमों में बंट गए हैं—एक पक्ष इसे गलत बता रहा है, तो दूसरा इसे राजनीतिक बयानबाजी कहकर बचाव कर रहा है।
धरने से उठा मुद्दा, अब बना बड़ा विवाद
दरअसल, यह बयान कांग्रेस सेवा दल के उस धरने के दौरान आया, जो वित्त रहित शिक्षा नीति के खिलाफ आयोजित किया गया था। लेकिन अब यह मुद्दा शिक्षा से निकलकर भाषा और पहचान की राजनीति तक पहुंच गया है।
बयान से बढ़ेगा सियासी तापमान
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बयान आने वाले दिनों में और बड़ा मुद्दा बन सकता है। खासकर ऐसे समय में जब भाषा और संस्कृति जैसे मुद्दे पहले से ही संवेदनशील बने हुए हैं।
फिलहाल एक बयान ने साफ कर दिया है—बिहार में अब भाषा भी सियासत का बड़ा हथियार बनती जा रही है।