लखीसराय: जिले की सामाजिक, व्यापारी और जनआंदोलन की पहचान बन चुके रामगोपाल ड्रोलिया अब इस दुनिया में नहीं रहे। गुरुवार की अहले सुबह उनके निधन की खबर जैसे ही फैली, पूरे लखीसराय में शोक की लहर दौड़ गई। 70 वर्षीय ड्रोलिया पिछले कुछ दिनों से बीमार थे और पटना में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।
रामगोपाल ड्रोलिया केवल एक नाम नहीं, बल्कि संघर्ष, साहस और सर्वहारा वर्ग की आवाज थे। चेम्बर ऑफ कॉमर्स के महासचिव के रूप में उन्होंने व्यापारियों के हक की लड़ाई लड़ी, तो वहीं समाज के कमजोर और बेजुबान लोगों के लिए हमेशा सड़कों से लेकर प्रशासनिक दफ्तरों तक डटकर खड़े रहे।
उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा, लेकिन हर संघर्ष में उन्होंने न्याय का साथ दिया। अन्याय के खिलाफ उनकी आवाज हमेशा बुलंद रही। मारवाड़ी समाज से लेकर जिले के विकास के हर मुद्दे पर वे एक प्रखर वक्ता और सशक्त नेतृत्व के रूप में जाने जाते थे।
गुरुवार सुबह उनका पार्थिव शरीर चितरंजन रोड स्थित उनके आवास पर लाया गया, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। आज दोपहर 3 बजे उनकी अंतिम यात्रा सिमरिया घाट के लिए प्रस्थान करेगी।
रामगोपाल ड्रोलिया के निधन से लखीसराय ने न सिर्फ एक नेता, बल्कि एक सच्चा समाजसेवी और जननायक खो दिया है। उनके जाने से जो शून्य पैदा हुआ है, उसे भर पाना आसान नहीं होगा।
आज हर आंख नम है, हर दिल भारी है…उनकी आवाज भले ही खामोश हो गई हो, लेकिन उनके संघर्ष और सिद्धांत हमेशा जिंदा रहेंगे।
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