लखीसराय की गलियों से निकली एक कहानी अब देश-विदेश के कबड्डी मैट पर गूंजने को तैयार है। नाम है—अच्युतानंद कुमार। साधारण परिवार का यह बेटा आज अपनी मेहनत और जुनून के दम पर एक ऐसे मुकाम पर पहुंच गया है, जहां से सपने नहीं, इतिहास बनते हैं।
बड़हिया के रामचरण टोला की मिट्टी में पले-बढ़े अच्युतानंद अब गांधीनगर के साई ट्रेनिंग सेंटर में होने वाले स्पेशल ट्रेनिंग कैंप के लिए चुने गए हैं। खास बात ये है कि यह ट्रेनिंग 2030 तक चलेगी—यानि अब उनकी तैयारी सीधे इंटरनेशनल मंच के लिए होगी।
कभी गांव के मैदान में दोस्तों के साथ खेला जाने वाला कबड्डी आज उनके लिए करियर ही नहीं, पहचान बन चुका है। पसीने की हर बूंद अब पदक में बदलने की तैयारी कर रही है।
अच्युतानंद की इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि टैलेंट को बस सही मौका चाहिए, मंजिल खुद रास्ता बना लेती है।
बिहार स्टेट कबड्डी एसोसिएशन और जिले के खेल अधिकारियों ने इसे “लखीसराय के लिए गौरव का पल” बताया है। वहीं कोच कोच राज कुमार सहनी और शुभम कुमार ने कहा कि अच्युतानंद आने वाले समय में देश का नाम रोशन करेंगे।
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