लखीसराय। बिहार दिवस 2026 के दूसरे दिन नगर भवन का नजारा कुछ अलग ही था—जहां हर कोना रंग, राग और उत्साह से सराबोर दिखा। मंच पर बच्चों की चहक, कलाकारों की प्रस्तुति और दर्शकों की तालियों ने मिलकर ऐसा माहौल बनाया, मानो पूरा लखीसराय एक साथ उत्सव मना रहा हो।

कार्यक्रम की शुरुआत होते ही नृत्य, गीत और नाटकों की श्रृंखला ने दर्शकों को बांध लिया। कभी पारंपरिक लोक धुनों पर थिरकते कदम, तो कभी आधुनिक अंदाज में सजी प्रस्तुतियां—हर परफॉर्मेंस ने यह साबित कर दिया कि बिहार की संस्कृति सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि जीवंत ऊर्जा है। स्कूली बच्चों की प्रस्तुति में जो आत्मविश्वास और रचनात्मकता दिखी, उसने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

लोक संस्कृति की झलक इस आयोजन की खास पहचान रही। गीतों और नाटकों के जरिए बिहार की समृद्ध विरासत को मंच पर इस तरह उतारा गया कि दर्शक खुद को उससे जुड़ा हुआ महसूस करने लगे।

सिर्फ मनोरंजन ही नहीं, बल्कि दिमागी हुनर का भी जलवा देखने को मिला। वाद-विवाद, भाषण और कविता लेखन जैसी प्रतियोगिताओं में प्रतिभागियों ने अपने विचारों की गहराई और अभिव्यक्ति की ताकत से सभी को प्रभावित किया। हर प्रतिभागी ने अपने अंदाज में समाज और सोच को आईना दिखाने की कोशिश की।

कार्यक्रम के अंत में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को जिलाधिकारी मिथिलेश मिश्रा के द्वारा सम्मानित किया गया। पुरस्कार पाकर बच्चों के चेहरे पर जो खुशी दिखी, वही इस आयोजन की असली सफलता थी।

नगर भवन में जुटी भीड़ ने इस आयोजन को और खास बना दिया। विद्यार्थी, शिक्षक, अभिभावक और आम नागरिक—हर कोई इस सांस्कृतिक उत्सव का हिस्सा बना और कलाकारों का हौसला बढ़ाता नजर आया।

जिला प्रशासन का यह प्रयास सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ने और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से रूबरू कराने की एक खूबसूरत पहल बन गया।

इस मौके पर अपर समाहर्ता नीरज कुमार, जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी शंभूनाथ, उप विकास आयुक्त सुमित कुमार, वरीय उप समाहर्ता शशि कुमार, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी रवि कुमार एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी यदुवंश राम सहित कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

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