शेखपुरा: महिला एवं बाल विकास निगम, शेखपुरा के तत्वावधान में गुरुवार को 100 दिवसीय बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम शेखपुरा प्रखंड के छैमा स्थित आंगनवाड़ी केंद्र संख्या–58 में संपन्न हुआ, जिसमें महिलाओं, किशोरियों एवं ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी रही।
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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला प्रोग्राम पदाधिकारी कुमारी पूनम ने बाल विवाह और लैंगिक हिंसा जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कानून के अनुसार लड़कियों की न्यूनतम विवाह आयु 18 वर्ष एवं लड़कों की 21 वर्ष निर्धारित है। इससे पूर्व विवाह कराना दंडनीय अपराध है, जिसके लिए जुर्माना और कारावास दोनों का प्रावधान है।
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उन्होंने कहा कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि यह बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य को गहरे संकट में डाल देता है। इससे होने वाले नुकसान की भरपाई जीवनभर संभव नहीं हो पाती। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि यदि कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिले तो तुरंत जिला प्रशासन को अवगत कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

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कार्यक्रम के दौरान महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी सरकारी व्यवस्थाओं की भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने सखी वन स्टॉप सेंटर की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए महिला हेल्पलाइन 181, चाइल्डलाइन 1098 और आपातकालीन पुलिस सहायता के लिए 112 नंबर की जानकारी साझा की और आपात स्थिति में इनके उपयोग के लिए लोगों को प्रेरित किया।
डिस्ट्रिक्ट हब फॉर वीमेन एंपावरमेंट के जिला मिशन समन्वयक पंकज कुमार वर्मा ने कहा कि बाल विवाह का विरोध करना महिला सशक्तिकरण की पहली सीढ़ी है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि एक शिक्षित, सुरक्षित और सशक्त समाज के निर्माण के लिए बाल विवाह को जड़ से समाप्त करना अनिवार्य है।
कार्यक्रम के अंतर्गत जिला प्रोग्राम पदाधिकारी कुमारी पूनम द्वारा बालिकाओं के बीच माहवारी स्वच्छता किट तथा नवजात शिशुओं की माताओं को बेबी किट का वितरण भी किया गया। इस पहल की ग्रामीण महिलाओं ने सराहना की।
इस अवसर पर डिस्ट्रिक्ट हब फॉर वीमेन एंपावरमेंट से जेंडर स्पेशलिस्ट रुपेश शर्मा, वित्तीय साक्षरता विशेषज्ञ सजल कुमार, लेखा सहायक रोहित कुमार, वन स्टॉप सेंटर की केंद्र प्रशासक कुमारी अमृता दयाल सहित एनजीओ आईडीएफ के कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज को बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक कर एक सुरक्षित और सशक्त भविष्य की दिशा में कदम बढ़ाना रहा।