यमन: यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार के बीच जारी संघर्ष एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को हूती विद्रोहियों ने यमन के अदन स्थित राष्ट्रपति भवन की ओर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इसके साथ ही अदन एयरपोर्ट को भी निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई है। दूसरी ओर सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने मदीना की ओर बढ़ रहे एक ड्रोन को हवा में ही मार गिराने का दावा किया है। लगातार सामने आ रहे इन हमलों से यमन और सऊदी अरब के बीच सुरक्षा तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
न्यूज एजेंसी AFP के मुताबिक, राष्ट्रपति भवन की ओर एंबुलेंस जाती हुई देखी गईं। हालांकि, मिसाइलें अपने निर्धारित लक्ष्य पर लगीं या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यमन सरकार के सैन्य प्रवक्ता ने अदन एयरपोर्ट पर भी बैलिस्टिक मिसाइल हमले की जानकारी दी, लेकिन तत्काल किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं की।
15 दिन में दूसरी बार राष्ट्रपति भवन पर हमला
अदन स्थित राष्ट्रपति भवन पर यह 15 दिनों के भीतर दूसरा हमला बताया जा रहा है। इससे पहले 15 अक्टूबर को भी राष्ट्रपति भवन परिसर को निशाना बनाया गया था। उस हमले में चार लोगों की मौत हुई थी और परिसर को काफी नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई थी। अब एक बार फिर दो बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले की सूचना ने यमन सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अदन यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में राष्ट्रपति भवन और एयरपोर्ट को निशाना बनाए जाने की खबर को संघर्ष के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
अदन एयरपोर्ट भी हूतियों के निशाने पर
राष्ट्रपति भवन के अलावा अदन एयरपोर्ट पर भी हमले की जानकारी सामने आई है। इससे पहले 28 अक्टूबर को भी हूती विद्रोहियों ने इस एयरपोर्ट को निशाना बनाया था। रिपोर्ट के मुताबिक, उस हमले से पहले लोगों को इलाका खाली करने की चेतावनी दी गई थी।
अदन एयरपोर्ट दक्षिणी यमन में राहत सामग्री और मानवीय सहायता पहुंचाने का महत्वपूर्ण रास्ता है। ऐसे में एयरपोर्ट पर हमलों से राहत और सहायता कार्य प्रभावित होने की आशंका भी बनी हुई है।
मदीना की ओर बढ़ता ड्रोन मार गिराने का दावा
यमन में मिसाइल हमलों के बीच सऊदी अरब ने भी अपनी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा दावा किया है। सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन के मुताबिक, शुक्रवार को मदीना की दिशा में आ रहे एक ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया गया। इससे पहले मक्का में भी एक ड्रोन को मार गिराने का दावा किया गया था।
मक्का और मदीना इस्लाम धर्म के सबसे पवित्र शहरों में शामिल हैं। मक्का में काबा और ग्रैंड मस्जिद स्थित हैं, जबकि मदीना में पैगंबर मोहम्मद की मस्जिद है। इन शहरों की ओर ड्रोन आने की खबरों ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है।
हालांकि, हूती विद्रोही मक्का और मदीना को निशाना बनाने से इनकार करते रहे हैं। उनका कहना है कि उनके हमले सऊदी अरब के सैन्य और तेल से जुड़े ठिकानों पर केंद्रित होते हैं।
2014 से जारी है यमन में सत्ता संघर्ष
यमन में मौजूदा संघर्ष की जड़ें 2014 में शुरू हुए घटनाक्रम से जुड़ी हैं। उस समय हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को राजधानी छोड़नी पड़ी और अदन उसका प्रमुख केंद्र बन गया।
2015 में सऊदी अरब ने कई देशों के साथ मिलकर यमन की सरकार के समर्थन में सैन्य अभियान शुरू किया। इस संघर्ष में हूती विद्रोहियों और सरकारी बलों के बीच लंबे समय तक लड़ाई जारी रही। हूती अब भी यमन के बड़े हिस्से में अपनी पकड़ बनाए हुए हैं।
सऊदी अरब के लिए क्यों बनी हुई है चुनौती?
सऊदी अरब के पास आधुनिक लड़ाकू विमान और उन्नत रक्षा प्रणालियां हैं, इसके बावजूद यमन में लंबे समय से जारी संघर्ष का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। हूती विद्रोहियों के ड्रोन और मिसाइल हमलों ने सऊदी अरब की सुरक्षा व्यवस्था के सामने लगातार चुनौती पेश की है।
यमन का पहाड़ी और दुर्गम भूभाग भी सैन्य कार्रवाई को कठिन बनाता है। इसके अलावा लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष से आर्थिक और मानवीय नुकसान का खतरा बना रहता है। ईरान पर हूती विद्रोहियों को समर्थन देने के आरोप भी लगते रहे हैं, हालांकि क्षेत्रीय संघर्ष में अलग-अलग पक्षों की भूमिका को लेकर विवाद जारी है।
फिलहाल अदन में राष्ट्रपति भवन और एयरपोर्ट पर हमले तथा सऊदी अरब की ओर ड्रोन भेजे जाने की घटनाओं ने क्षेत्र में तनाव को फिर चर्चा में ला दिया है। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया और सुरक्षा हालात पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी।
ये खबर भी पढ़े: स्पेन में दो हाई-स्पीड ट्रेनों की टक्कर, 39 लोगों की मौत; मैड्रिड-अंडालूसिया रेल सेवा बंद!