कैमूर: सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी के आरोपों के बीच कुदरा अंचल कार्यालय से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें कथित तौर पर रिश्वत की रकम ऑनलाइन Google Pay के जरिए लेने का आरोप लगाया गया है। देवराढ़ कला निवासी सूर्यकांत तिवारी ने अंचल कार्यालय के बड़ा बाबू बाढू राम पर जमीन से जुड़े मामले में धारा 44 की कार्रवाई और म्यूटेशन के नाम पर ₹500 मांगने और लेने का आरोप लगाया है।
पीड़ित का दावा है कि उसके पास कथित ऑनलाइन लेन-देन का स्क्रीनशॉट भी मौजूद है। मामला सामने आने के बाद अनुमंडल पदाधिकारी, मोहनिया रत्ना प्रियदर्शिनी ने संज्ञान लेते हुए कुदरा अंचलाधिकारी को पूरे प्रकरण की जांच करने का निर्देश दिया है।
जमीन विवाद में कार्रवाई के नाम पर पैसे मांगने का आरोप
सूर्यकांत तिवारी, पिता कृपाशंकर तिवारी, का कहना है कि वह अपनी रैयती जमीन पर कथित अवैध कब्जे के खिलाफ कार्रवाई और न्याय की मांग को लेकर लंबे समय से अंचल कार्यालय का चक्कर लगा रहे थे। उनके अनुसार, जमीन से संबंधित मामले में धारा 44 की कार्रवाई और म्यूटेशन के काम को आगे बढ़ाने के लिए उनसे कथित तौर पर पैसे की मांग की गई।
पीड़ित के मुताबिक, इसी क्रम में उन्होंने अपनी पत्नी नीतू कुमारी के बैंक खाते से Google Pay के माध्यम से ₹500 बाढू राम के खाते में ट्रांसफर किए। बताया गया है कि यह लेन-देन 25 सितंबर 2026 को हुआ।
स्क्रीनशॉट को बनाया गया शिकायत का आधार
पीड़ित ने कथित ऑनलाइन भुगतान के स्क्रीनशॉट को भी सामने रखा है। उनका दावा है कि यह डिजिटल लेन-देन रिश्वत के तौर पर मांगी गई रकम के भुगतान का सबूत है। हालांकि, इस भुगतान का वास्तविक उद्देश्य और उसमें रिश्वत की भूमिका क्या थी, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
मामला अनुमंडल कार्यालय मोहनिया तक पहुंचने के बाद प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है। एसडीएम रत्ना प्रियदर्शिनी ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है और अंचलाधिकारी को पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच का निर्देश दिया गया है।
जांच में आरोप सही मिले तो होगी कार्रवाई
एसडीएम के अनुसार, जांच के दौरान आरोपों की सत्यता की पड़ताल की जाएगी। यदि जांच में कर्मचारी के खिलाफ लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
एसडीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि अंचल कार्यालय में निजी सहायकों या बिचौलियों के माध्यम से सरकारी काम कराने की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने पीड़ित को धारा 44 से संबंधित मामले में आवश्यक सुरक्षा और त्वरित कार्रवाई का भरोसा भी दिया है।
डिजिटल भुगतान ने बढ़ाए सवाल
इस मामले ने सरकारी कार्यालयों में कथित रिश्वतखोरी के तरीके को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर नकद लेन-देन से जुड़े आरोप सामने आते रहे हैं, लेकिन यहां शिकायतकर्ता ने ऑनलाइन भुगतान का स्क्रीनशॉट पेश किए जाने का दावा किया है।
अब जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि ₹500 का भुगतान किस उद्देश्य से किया गया था, भुगतान किस खाते में गया, संबंधित कर्मचारी की भूमिका क्या थी और जमीन से जुड़े काम के बदले वास्तव में किसी प्रकार की अवैध राशि की मांग की गई थी या नहीं।
फिलहाल प्रशासनिक जांच के आदेश के बाद पूरे मामले की नजर जांच रिपोर्ट पर है। जांच के निष्कर्ष के आधार पर ही आरोपों की वास्तविकता और जिम्मेदारी तय हो सकेगी।
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