सीतामढ़ी: सरकारी कार्यालय में जहां लोगों की समस्याओं का समाधान होना चाहिए, वहीं सीतामढ़ी के डुमरा अंचल कार्यालय में कर्मचारियों के बीच विवाद का ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने पूरे विभाग को सवालों के घेरे में ला दिया है। यहां एक महिला लिपिक और नाजिर के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मामला हाथापाई और चप्पल चलने तक पहुंच गया। घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
बताया जा रहा है कि दोनों कर्मचारी अगस्त महीने से डुमरा अंचल कार्यालय में तैनात हैं। विवाद की शुरुआत **बासगीत पर्चा **वितरण से संबंधित पत्र को रिसीव करने को लेकर हुई।
पत्र रिसीव करने से शुरू हुआ विवाद, फिर बिगड़ गई बात
महिला लिपिक विमल कुमारी का आरोप है कि वह नाजिर प्रकाश कुमार झा को बास्कीत पर्चा से संबंधित पत्र रिसीव कराने गई थीं। उनका आरोप है कि नाजिर ने पत्र लेने से इनकार कर दिया। इसी बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी हुई और देखते ही देखते विवाद गाली-गलौज और मारपीट तक पहुंच गया।
VIDEO में चप्पल से हमला करते दिखे कर्मचारी
वायरल वीडियो में दोनों कर्मचारियों के बीच हाथापाई होती दिखाई दे रही है। वीडियो में प्रकाश कुमार झा हाथ में कागजों का बंडल लिए महिला लिपिक की ओर बढ़ते नजर आते हैं। इसके बाद महिला लिपिक चप्पल निकालकर उनकी ओर फेंकती दिखाई देती हैं।
चप्पल नहीं लगने के बाद वीडियो में प्रकाश कुमार झा भी चप्पल उठाकर महिला की ओर मारते नजर आते हैं। मौके पर मौजूद लोगों ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है।
हालांकि वायरल वीडियो की पूरी पृष्ठभूमि और घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है।
नाजिर बोले- ‘जूता पहने थे, चप्पल थी ही नहीं’
घटना को लेकर जब नाजिर प्रकाश कुमार झा से उनका पक्ष पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्होंने जूता पहन रखा था और उनके पास चप्पल नहीं थी। हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में वह चप्पल उठाकर महिला की ओर मारते हुए दिखाई दे रहे हैं।
उनके इस बयान और वायरल वीडियो के बीच अंतर को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। मामले की वास्तविकता जांच के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
सरकारी दफ्तर में ‘चप्पल कांड’ से व्यवस्था पर सवाल
डुमरा अंचल कार्यालय की घटना ने सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों के व्यवहार और अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम लोगों के कामकाज से जुड़े कार्यालय में कर्मचारियों के बीच इस तरह हाथापाई और चप्पल चलने का वीडियो सामने आना प्रशासन के लिए भी असहज करने वाला है।
सवाल यह है कि अगर सरकारी कार्यालय में ही कर्मचारी आपस में हाथापाई करेंगे तो आम फरियादी अपनी समस्या लेकर कहां जाए?
क्या कार्यालय में विवाद को रोकने के लिए कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं था?
क्या कर्मचारियों के बीच हुए इस कथित विवाद की विभागीय जांच होगी?
और सबसे बड़ा सवाल—वायरल वीडियो सामने आने के बाद जिम्मेदार कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई होगी?
अब अधिकारियों की कार्रवाई का इंतजार
फिलहाल घटना को लेकर कार्यालय और स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का दौर जारी है। दोनों पक्षों के बयान सामने आने के बाद अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
वायरल वीडियो की सत्यता, विवाद की शुरुआत और मारपीट की वास्तविक परिस्थितियों की जांच के बाद ही दोषी की जिम्मेदारी तय हो सकेगी।
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