किशनगंज: देश आजादी के 79 साल पूरे कर चुका है, लेकिन किशनगंज के बहादुरगंज प्रखंड में विकास की एक तस्वीर आज भी लोगों को सवाल करने पर मजबूर करती है। यहां नोदिया टोली-बैसा घाट पर खकवा नदी के ऊपर पुल नहीं होने से ग्रामीणों को शव तक नदी पार कर ले जाना पड़ता है। सोमवार को सड़क हादसे में जान गंवाने वाली 20 वर्षीय शहनसवी बेगम के शव को भी ग्रामीण कंधे पर उठाकर नदी में उतरे और खकवा नदी पार कर बैसा कब्रिस्तान पहुंचे।
शोक के बीच नदी पार करने की मजबूरी
बीरपुर निवासी सईदुर्रहमान की 20 वर्षीय बेटी शहनसवी बेगम की सड़क हादसे में मौत के बाद परिजन और ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए शव लेकर निकले। बैसा कब्रिस्तान पहुंचने के रास्ते में खकवा नदी पड़ती है। घाट पर पुल नहीं होने के कारण ग्रामीण शव को कंधे पर लेकर नदी के पानी में उतर गए।
यह दृश्य इलाके की वर्षों पुरानी समस्या को एक बार फिर सामने ले आया। अपनों को खोने का गम झेल रहे परिवार के सामने अंतिम विदाई तक पहुंचने के लिए नदी पार करने की मजबूरी थी।
कई गांवों की जिंदगी इसी घाट पर निर्भर
नोदिया टोली, चकचकी, झींगाकाटा, दोगाछी, दर्जी टोला, लाटटोला, बैसा, तेघरिया और धापरटोली समेत कई गांवों के हजारों लोग इस रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। ग्रामीणों के लिए यह सिर्फ कब्रिस्तान जाने का रास्ता नहीं, बल्कि रोजमर्रा की आवाजाही का भी महत्वपूर्ण मार्ग है।
बरसात में खतरनाक हो जाता है रास्ता
ग्रामीणों के मुताबिक गर्मी और सामान्य मौसम में किसी तरह नदी पार कर ली जाती है, लेकिन बरसात में खकवा नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ खतरा कई गुना बढ़ जाता है। तेज बहाव के बीच नदी पार करना कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
बीमार व्यक्ति को अस्पताल ले जाना हो या किसी की अंतिम यात्रा—हर बार ग्रामीणों को इसी जोखिम से गुजरना पड़ता है।
कई बार उठी पुल निर्माण की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि पुल निर्माण को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से मांग की जा चुकी है। ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से स्थल निरीक्षण किए जाने की बात भी सामने आई है, लेकिन अब तक पुल निर्माण शुरू नहीं हो सका है।
जिला पार्षद प्रतिनिधि इमरान आलम के अनुसार, पुल निर्माण को लेकर अधिकारियों से कई बार बातचीत की गई है। बिहार सरकार के ग्रामीण कार्य मंत्री के समक्ष भी इस समस्या को रखा गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।
ग्रामीणों का सवाल—आखिर कब बनेगा पुल?
ग्रामीणों का कहना है कि पुल बनने से कई गांवों के लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी। बरसात के दिनों में नदी पार करने का खतरा भी खत्म होगा।
फिलहाल सवाल यही है कि आखिर कब तक ग्रामीण अपने प्रियजनों के शव को कंधे पर लेकर नदी पार करने को मजबूर रहेंगे? आजादी के 79 साल बाद भी एक पुल का इंतजार स्थानीय लोगों के लिए विकास की हकीकत पर सवाल खड़ा कर रहा है।
ग्रामीणों ने किशनगंज जिलाधिकारी और बिहार सरकार से नोदिया टोली-बैसा घाट पर खकवा नदी के ऊपर जल्द पुल निर्माण कराने की मांग की है।
ये खबर भी पढ़े: बगहा में पुलिस टीम पर ग्रामीणों का हमला, SI समेत कई पुलिसकर्मी घायल; वाहनों में तोड़फोड़!
किशनगंज से रज़ी अहमद की रिपोर्ट…