रांची: रक्षाबंधन के मौके पर झारखंड में इस बार भाई-बहन के रिश्ते के साथ इंसान और प्रकृति के रिश्ते की भी मिसाल देखने को मिलेगी। राज्य के 700 गांवों में करीब एक लाख पेड़ों को राखी बांधकर उनकी रक्षा का संकल्प लिया जाएगा। यह अभियान गुमला जिले के जोराड़ गांव से शुरू किया जा रहा है।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार के अनुसार, यह पहल ‘पेड़ बचाओ’ अभियान का हिस्सा है, जो एक महीने तक चलेगा। इस दौरान झारखंड के 24 जिलों में करीब तीन लाख पेड़ों को राखी बांधने का लक्ष्य रखा गया है।
राखी बांधकर पेड़ों की रक्षा का संकल्प
अभियान का उद्देश्य लोगों को पेड़ों और प्रकृति से भावनात्मक रूप से जोड़ना है। रक्षाबंधन पर जिस तरह भाई अपनी बहन की रक्षा का संकल्प लेते हैं, उसी तरह ग्रामीण पेड़ों को राखी बांधकर उनके संरक्षण की जिम्मेदारी लेने का संदेश देंगे।
2004 में शुरू हुई थी पहल
इस अभियान की शुरुआत वर्ष 2004 में धनबाद के टुंडी प्रखंड के लुकैया गांव से हुई थी। अधिकारियों के मुताबिक, अब तक राज्य के 12 हजार से अधिक गांव इस पहल से जुड़ चुके हैं। लुकैया में ही 20 हजार से ज्यादा महुआ के पेड़ों को संरक्षण मिला, जिससे ग्रामीणों की आजीविका को भी फायदा हुआ।
बढ़ रहा झारखंड का वन क्षेत्र
वन विभाग के अनुसार, भारतीय वन सर्वेक्षण की रिपोर्ट में झारखंड के वन क्षेत्र में वृद्धि दर्ज की गई है। एफएसआई 2023 के मुताबिक राज्य का वन क्षेत्र 23,765.78 वर्ग किलोमीटर, यानी कुल भौगोलिक क्षेत्र का 29.76 प्रतिशत है। वर्ष 2001 के मुकाबले इसमें 1,128 वर्ग किलोमीटर की बढ़ोतरी बताई गई है।
वन विभाग का कहना है कि पेड़ों का संरक्षण जल संरक्षण, जैव विविधता और कृषि के लिए भी महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी पर्यावरण संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए पौधारोपण के साथ उनकी देखभाल और सुरक्षा पर जोर दे चुके हैं।
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