भारत/नेपाल: नेपाल में रसुवा और आसपास के इलाकों में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद तबाही का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। नेपाल पुलिस के ताजा अपडेट के मुताबिक 157 शव बरामद किए जा चुके थे, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं। गुरुवार सुबह की ताजा रिपोर्टों में मृतकों की संख्या बढ़कर 162 होने की जानकारी सामने आई है।
बाढ़ की शुरुआत नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हुई। भोटेकोशी नदी में अचानक आए तेज बहाव ने रसुवा के टिमुरे समेत कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा और चट्टानें भी नीचे की ओर आईं, जिससे मकान, सड़कें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे तबाह हो गए।
157 शव नेपाल के अलग-अलग जिलों से मिले
सरकारी आंकड़ों के अनुसार शुरुआती चरण में रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, चितवन, तनहु और नवलपरासी ईस्ट से शव बरामद किए गए। सबसे ज्यादा शव चितवन के नाराजगी नदी क्षेत्र से मिले। राहत और बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
700 से ज्यादा लोग अब भी संपर्कविहीन
बाढ़ के बाद स्थानीय लोगों के अलावा सुरक्षा बलों और पर्यटकों के भी लापता होने की सूचना है। पर्यटन बोर्ड के अनुसार सैकड़ों पर्यटक संपर्क से बाहर हैं। ताजा अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में 579 पर्यटकों के लापता होने की जानकारी दी गई है। इनमें 400 से अधिक विदेशी नागरिक शामिल हैं।
133 भारतीयों की तलाश
बाढ़ प्रभावित इलाके कैलाश मानसरोवर यात्रा के प्रमुख मार्गों में शामिल हैं। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक 133 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें कैलाश मानसरोवर जाने वाले श्रद्धालु भी शामिल हैं। अलग-अलग समय पर जारी आंकड़ों में अंतर है, क्योंकि बचाव दल लगातार लापता लोगों की जानकारी अपडेट कर रहे हैं।
पुल और सड़कें बहने से संपर्क टूटा
फ्लैश फ्लड ने नेपाल के परिवहन नेटवर्क को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। कई मोटरेबल और सस्पेंशन पुल बह गए हैं। सड़कें मलबे में तब्दील हो गई हैं, जिससे राहत टीमों के लिए प्रभावित इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है।
आखिर इतनी भयावह बाढ़ कैसे आई?
शुरुआत में भूकंप को बाढ़ से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन बाद के वैज्ञानिक आकलन में तस्वीर बदल गई। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार जिस भूकंपीय घटना को पहले भूकंप माना गया था, वह वास्तव में ग्लेशियल कोलैप्स और मलबे के तेज बहाव से जुड़ी घटना थी। इसके बाद पानी और मलबे की विशाल लहर नदी के रास्ते नीचे की ओर चली गई।
रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे हजारों लोग
नेपाल सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के जवान प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान चला रहे हैं। हेलिकॉप्टरों की मदद से फंसे लोगों को निकाला जा रहा है और दूरदराज के इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। सड़क और बिजली व्यवस्था को नुकसान होने के कारण कई इलाकों में बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
भारत ने नेपाल में राहत अभियान के लिए मानवीय सहायता और जरूरी सामग्री भेजी है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने और बचाव प्रयासों में सहयोग किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात कर भारत की ओर से हरसंभव मानवीय सहायता का भरोसा दिया है।
तिब्बत में भी भारी नुकसान
आपदा का असर नेपाल तक सीमित नहीं रहा। चीन के तिब्बत क्षेत्र के ग्यिरोंग में भी बाढ़ और मलबे से भारी नुकसान हुआ है। चीनी सरकारी मीडिया के मुताबिक वहां 3 लोगों की मौत और सैकड़ों लोगों के लापता होने की सूचना है।
फिलहाल नेपाल में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। अधिकारियों को आशंका है कि मलबे और क्षतिग्रस्त इलाकों में और शव मिल सकते हैं। ऐसे में मृतकों और लापता लोगों का आंकड़ा आने वाले घंटों में बदल सकता है।
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