रांची: झारखंड के खनिज संसाधनों और राजस्व के अधिकार को लेकर राज्य सरकार और केंद्र के बीच टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। केंद्र सरकार के एमएमडीआर एक्ट में किए गए संशोधनों के खिलाफ हेमंत सोरेन सरकार ने कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला किया है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के मुताबिक, मुख्यमंत्री की सहमति के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी पूरी की जा रही है।
राज्य सरकार का दावा है कि नए प्रावधानों से झारखंड के खनिज राजस्व पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। सरकार का तर्क है कि प्राकृतिक संसाधनों से मिलने वाला राजस्व राज्य की विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
केंद्र के संशोधन पर क्यों नाराज है झारखंड?
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर संशोधित प्रावधानों के वित्तीय और कानूनी प्रभाव की समीक्षा की। सरकार के मुताबिक, धारा 9डी समेत कुछ प्रावधानों से राज्य के राजस्व संग्रह और खनिजों पर टैक्स, सेस या लेवी लगाने के अधिकार पर असर पड़ सकता है।
राज्य सरकार इसे केवल आर्थिक नुकसान का मामला नहीं, बल्कि संघीय ढांचे से जुड़ा मुद्दा भी बता रही है। वित्त मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े मामलों में राज्यों के अधिकारों को कमजोर करना संघीय व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
हेमंत सोरेन ने दी हरी झंडी
बैठक के बाद वित्त मंत्री ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूरे मामले पर चर्चा की। मुख्यमंत्री की सहमति के बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की तैयारी शुरू कर दी है।
राज्य सरकार का कहना है कि झारखंड के प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े अधिकार और उससे मिलने वाला राजस्व राज्य की जनता के हित में इस्तेमाल होता है। ऐसे में सरकार इन अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने को तैयार है।
अगले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में याचिका की तैयारी
सरकार की ओर से कानूनी मसौदा तैयार किए जाने की बात कही गई है। अब अगले सप्ताह तक सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
एमएमडीआर एक्ट के संशोधनों को लेकर झारखंड सरकार के इस कदम से केंद्र और राज्य के बीच खनिज अधिकारों, राजस्व और संघीय ढांचे को लेकर राजनीतिक एवं कानूनी टकराव और तेज होने के संकेत हैं।
ये खबर भी पढ़े: Bihar: पति पर दूसरी शादी का आरोप, कोर्ट रोड पर महिला का हाई-वोल्टेज ड्रामा; कॉलर पकड़कर पीटा और सड़क पर घसीटा!