पटना: लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) में बुधवार को हुए बड़े संगठनात्मक बदलाव ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। चिराग पासवान ने पार्टी की प्रदेश टीम में बड़ा फेरबदल करते हुए बिहार की कमान अब सुरेंद्र विवेक को सौंप दी है। लंबे समय से बिहार प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे राजू तिवारी को राष्ट्रीय स्तर पर नई जिम्मेदारी दी गई है।
लेकिन सवाल सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष बदलने का नहीं है। आखिर चिराग पासवान ने अभी संगठन में इतना बड़ा बदलाव क्यों किया? नई टीम में किन चेहरों को जगह मिली और क्या यह आने वाले चुनावों की रणनीति का संकेत है?
अचानक बदली बिहार की कमान
पार्टी ने सुरेंद्र विवेक को बिहार का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। वह बेगूसराय के साहेबपुर कमाल विधानसभा क्षेत्र से पार्टी के उम्मीदवार रह चुके हैं और संगठन में प्रदेश प्रवक्ता तथा प्रदेश कोषाध्यक्ष जैसी जिम्मेदारियां भी संभाल चुके हैं।
दूसरी ओर, राजू तिवारी को राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है। यानी बिहार संगठन की कमान भले ही उनके हाथ से गई हो, लेकिन राष्ट्रीय संगठन में उनकी भूमिका और बढ़ाई गई है।
असली रणनीति क्या है?
पार्टी में यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब आने वाले समय में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में संगठन में नए चेहरों को जिम्मेदारी देना महज सामान्य फेरबदल नहीं, बल्कि चुनावी तैयारियों से जुड़ा कदम भी माना जा रहा है।
नई टीम में युवाओं, महिलाओं और जमीनी स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी संगठन को नए सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों के साथ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
चार सांसदों को भी मिली जगह
नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में बिहार के चार सांसदों को शामिल किया गया है। इनमें जमुई के अरुण भारती, वैशाली की वीणा देवी, समस्तीपुर की शांभवी चौधरी और खगड़िया के राजेश वर्मा शामिल हैं।
इसके अलावा झारखंड में भी नेतृत्व परिवर्तन किया गया है। जनार्दन पासवान को झारखंड प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र प्रधान को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है।
चिराग के सामने अब बड़ी चुनौती
चिराग पासवान खुद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय संसदीय बोर्ड के चेयरमैन बने हुए हैं। नई टीम के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और अलग-अलग राज्यों में पार्टी की राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की होगी।
सुरेंद्र विवेक के सामने बिहार में नई टीम को सक्रिय करने की जिम्मेदारी होगी, जबकि राजू तिवारी राष्ट्रीय संगठन में अपनी भूमिका निभाएंगे।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह सिर्फ संगठनात्मक फेरबदल है, या चिराग पासवान ने आने वाले चुनावों के लिए अपनी बड़ी राजनीतिक रणनीति की पहली चाल चल दी है?
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