लखीसराय: सावन की चौथी और अंतिम सोमवारी पर प्रसिद्ध धार्मिक स्थल अशोक धाम में वह रौनक नहीं दिखी, जिसकी आमतौर पर उम्मीद की जाती है। मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में श्रद्धालुओं की भीड़ बेहद कम रही। तीसरी सोमवारी को हुए दर्दनाक हादसे के बाद यह तस्वीर कई सवाल छोड़ गई।
तीसरी सोमवारी को मंदिर परिसर में करंट और बैरिकेडिंग से जुड़ी अव्यवस्था के बीच 8 महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया था। घटना के बाद मंदिर प्रबंधन समिति से लेकर प्रशासनिक व्यवस्था तक पर सवाल उठे थे।
अंतिम सोमवारी पर प्रशासन ने झोंकी पूरी ताकत
हादसे के बाद चौथी सोमवारी को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट नजर आया। जिला प्रशासन, मंदिर कमेटी और जिला पुलिस के साथ-साथ रेल पुलिस जमालपुर और झाझा की तैनाती की गई। बड़ी संख्या में दंडाधिकारियों और पुलिस बल को भी लगाया गया, ताकि पिछली घटना जैसी स्थिति दोबारा न बने।
भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की आवाजाही को लेकर व्यापक इंतजाम किए गए। लेकिन इन तैयारियों के बावजूद मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या उम्मीद के मुताबिक नहीं पहुंची।
हादसे की याद ने बदल दिया भक्तों का रुख?
अशोक धाम में चौथी सोमवारी की कम भीड़ को केवल संयोग मानना आसान नहीं है। तीसरी सोमवारी के हादसे में आठ महिला श्रद्धालुओं की मौत के बाद लोगों के मन में सुरक्षा को लेकर सवाल पैदा हुए हैं।
जिस मंदिर में सावन की सोमवारी पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता था, वहां अंतिम सोमवारी पर अपेक्षाकृत सन्नाटा दिखना हादसे के बाद बदले माहौल का संकेत माना जा रहा है।
क्या कम भीड़ व्यवस्था के खिलाफ मौन संदेश?
लखीसराय की राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था, मंदिर ट्रस्ट तथा प्रशासन इसे जिस नजर से देखे, लेकिन श्रद्धालुओं की चौथी सोमवारी में कम उपस्थिति को व्यवस्था के प्रति एक सांकेतिक असंतोष के रूप में भी देखा जा रहा है।
आस्था के केंद्र में आने वाले श्रद्धालुओं का भरोसा केवल धार्मिक भावना से नहीं, बल्कि सुरक्षित व्यवस्था से भी जुड़ा होता है। तीसरी सोमवारी की घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या श्रद्धालु अब अशोक धाम में पहले जैसी सुरक्षा महसूस कर पा रहे हैं?
हादसे के बाद उठे सवालों का जवाब जरूरी
तीसरी सोमवारी की घटना में आठ महिलाओं की मौत के बाद कई स्तरों पर सवाल उठे थे। करंट की स्थिति कैसे बनी, बैरिकेडिंग की व्यवस्था कैसी थी और भीड़ नियंत्रण के लिए तैनात सिस्टम ने समय रहते काम क्यों नहीं किया—इन सवालों के जवाब श्रद्धालुओं के भरोसे के लिए बेहद जरूरी हैं।
चौथी सोमवारी पर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था भले ही मजबूत कर दी हो, लेकिन कम भीड़ ने बता दिया कि हादसे का असर सिर्फ उस दिन तक सीमित नहीं रहा।
अब चुनौती केवल भीड़ संभालने की नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के मन में दोबारा सुरक्षा और भरोसा कायम करने की है।
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