शेखपुरा: शेखपुरा का प्लेस ऑफ सेफ्टी इन दिनों गंभीर आरोपों के घेरे में है। यहां बंदियों ने जेल व्यवस्था को लेकर ऐसे सनसनीखेज आरोप लगाए हैं, जो यदि जांच में सही साबित होते हैं तो पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर सकते हैं। बंदियों का दावा है कि परिसर में कथित तौर पर मोबाइल और गांजे का इस्तेमाल पैसे लेकर कराया जा रहा है। इतना ही नहीं, इसका विरोध करने वाले बंदियों को कथित तौर पर मारपीट और प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है।
बंदियों के मुताबिक, बड़े मोबाइल के लिए कथित तौर पर 15 हजार रुपये और छोटे मोबाइल के लिए 5 हजार रुपये प्रतिमाह लिए जाते हैं। उनका दावा है कि प्लेस ऑफ सेफ्टी में इस समय करीब 15-16 मोबाइल चल रहे हैं। गांजा उपलब्ध कराने के लिए भी कथित तौर पर अलग से पैसे लिए जाने का आरोप लगाया गया है।
‘पैसा दो, मोबाइल चलाओ और गांजा पीओ’—बंदियों का गंभीर आरोप
दूरभाष पर बातचीत में बंदियों ने आरोप लगाया कि यह पूरा खेल कथित तौर पर जेल अधीक्षक सुदर्शन शर्मा की सहमति से चल रहा है। उनका दावा है कि पैसे देने वाले बंदियों को मोबाइल रखने और इस्तेमाल करने की सुविधा मिलती है।
अगर ये आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देकर एक-दो नहीं, बल्कि इतने मोबाइल आखिर प्लेस ऑफ सेफ्टी के भीतर कैसे पहुंच रहे हैं?
विरोध की कीमत ‘पिटाई’! पांच बंदियों को पीटने का दावा
बंदियों का सबसे गंभीर आरोप मारपीट को लेकर है। उनका दावा है कि सोमवार को मोबाइल और कथित नशे के इस्तेमाल का विरोध करने वाले पांच बंदियों के साथ मारपीट की गई।
बंदियों ने आरोप लगाया कि इस घटना में जेल अधीक्षक के अलावा कर्मी सनी कुमार, विश्वमोहन, एलेक्स, राजा और विक्की उर्फ अंकित भी शामिल थे।
हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
अधिकारी के कपड़े तक साफ कराए जाते हैं’—बंदियों का सनसनीखेज आरोप
बंदियों ने जेल अधीक्षक पर कथित तौर पर अमानवीय व्यवहार का भी आरोप लगाया है। उनका दावा है कि उनसे जेल अधीक्षक के कपड़े, यहां तक कि निजी वस्त्र तक साफ कराए जाते हैं।
बंदियों ने यह भी आरोप लगाया कि भागलपुर से जुड़े बंदियों को कथित तौर पर विशेष समर्थन दिया जाता है। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
वीडियो और मोबाइल बातचीत होने का दावा
बंदियों का कहना है कि उन्होंने कथित मोबाइल इस्तेमाल, गांजा पीने और मारपीट से जुड़े वीडियो उपलब्ध कराए हैं। उनके अनुसार, मोबाइल पर हुई बातचीत से संबंधित साक्ष्य भी मौजूद हैं।
अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि वीडियो असली हैं या नहीं, मोबाइल किसके हैं, वे परिसर में कैसे पहुंचे और यदि पैसे की वसूली हुई तो उसका नेटवर्क कहां तक फैला है?
डीएम-एसपी को सूचना, फिर भी जवाब का इंतजार
बंदियों की ओर से मामले की जानकारी डीएम और एसपी को दिए जाने की बात कही गई है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक प्रशासन की ओर से आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली थी।
उठ रहे हैं बड़े सवाल
- प्लेस ऑफ सेफ्टी के अंदर इतने मोबाइल कैसे पहुंचे?
- मोबाइल रखने के बदले पैसे लेने का आरोप कितना सच है?
- गांजा परिसर के भीतर पहुंचने का रास्ता क्या है?
- सोमवार को पांच बंदियों के साथ वास्तव में क्या हुआ?
- क्या कथित मारपीट के वीडियो की जांच होगी?
- बंदियों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच कौन करेगा?
- यदि आरोप गलत हैं तो प्रशासन खुलकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करता?
यह मामला महज जेल अनुशासन का नहीं, बल्कि बंदियों की सुरक्षा, प्रशासनिक निगरानी और कथित भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा गंभीर मामला है। अब निगाहें जिला प्रशासन और पुलिस की जांच पर हैं।
इस खबर में वर्णित मोबाइल, गांजा, वसूली, मारपीट और पक्षपात से संबंधित आरोप बंदियों द्वारा लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित जेल प्रशासन/अधिकारियों का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
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