पटना: बिहार की सत्ता में NDA की तस्वीर इन दिनों एक के बाद एक सरकारी कार्यक्रमों में सियासी सवाल खड़े कर रही है। सोमवार को पटना की तिरंगा यात्रा में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी तो करीब डेढ़ किलोमीटर हाथ में तिरंगा लेकर पैदल चलते नजर आए, लेकिन दोनों उपमुख्यमंत्रियों की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बन गई। इससे एक दिन पहले लखीसराय में JDU कोटे के उपमुख्यमंत्री विजेंद्र यादव के कार्यक्रम से भाजपा कोटे के कृषि मंत्री विजय सिन्हा के नदारद रहने की चर्चा थी।
लगातार दो दिनों के इन कार्यक्रमों में सत्ता गठबंधन के अलग-अलग प्रमुख चेहरों की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या ये महज संयोग है, प्रोटोकॉल का मामला है या NDA के भीतर किसी तरह की दूरी की आहट? फिलहाल इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन सियासी चर्चाओं को जरूर हवा मिल गई है।
पटना में सोमवार को ‘हर घर तिरंगा अभियान’ के तहत जेपी गोलंबर से कारगिल चौक तक तिरंगा यात्रा निकाली गई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी हाथ में तिरंगा लेकर करीब 1.5 किलोमीटर पैदल चले। उनके साथ बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, छात्र, एनसीसी कैडेट और आम लोग भी नजर आए।
लेकिन इस पूरे कार्यक्रम में दोनों उपमुख्यमंत्रियों की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया। विजय चौधरी के पटना से बाहर होने की जानकारी सामने आई है। वहीं विजेंद्र यादव भी कार्यक्रम में मौजूद नहीं दिखे। उनकी अनुपस्थिति को लेकर अलग-अलग चर्चाएं जरूर हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर इसे किसी राजनीतिक मतभेद से जोड़ने की पुष्टि नहीं हुई है।
इससे पहले गांधी मैदान में भी एक अलग तस्वीर देखने को मिली। मुख्यमंत्री का काफिला गेट नंबर 12 से अंदर गया और सुरक्षा कारणों से गेट बंद कर दिया गया। भाजपा नेता एवं मंत्री दिलीप जायसवाल और शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के स्टाफ की ओर से गेट खोलने का आग्रह किया जाता रहा। करीब पांच मिनट इंतजार के बाद गेट खोला गया।
अब नजर डालिए एक दिन पहले की तस्वीर पर। लखीसराय में JDU कोटे के उपमुख्यमंत्री विजेंद्र यादव के कार्यक्रम में भाजपा कोटे के कृषि मंत्री विजय सिन्हा की गैरमौजूदगी चर्चा में रही। यानी 24 घंटे के भीतर दो अलग-अलग सरकारी कार्यक्रम और सत्ता गठबंधन के प्रमुख नेताओं की गैरमौजूदगी—सियासी गलियारों में सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालांकि, किसी नेता की कार्यक्रम में अनुपस्थिति को सीधे तौर पर राजनीतिक मतभेद का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। नेताओं के कार्यक्रम अलग होने, क्षेत्रीय दौरे, प्रशासनिक व्यस्तता या अन्य कारण भी हो सकते हैं। लेकिन राजनीति में तस्वीरें और मौजूदगी भी संदेश देती हैं, इसलिए इन घटनाओं को लेकर चर्चाएं तेज होना तय माना जा रहा है।
इधर, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने तिरंगा यात्रा के जरिए सरकार के राष्ट्रवादी और भागीदारी वाले संदेश को मजबूती देने की कोशिश की। यात्रा में स्कूली बच्चे, छात्राएं और एनसीसी कैडेट बड़ी संख्या में शामिल हुए।
सवाल अब सिर्फ इतना नहीं कि कौन कार्यक्रम में आया और कौन नहीं आया। बड़ा सवाल यह है कि NDA की सत्ता में क्या नेताओं के बीच समन्वय पहले जैसा मजबूत है? अगर ये सिर्फ संयोग हैं तो अगले कुछ दिनों के कार्यक्रमों में गठबंधन के सभी प्रमुख चेहरे एक साथ नजर आएंगे। और अगर तस्वीरें लगातार ऐसी ही बनी रहीं, तो बिहार की राजनीति में ‘कौन साथ है, कौन दूर?’ वाली चर्चा और तेज होना तय है।
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