मधुबनी: भारत-नेपाल सीमा से अवैध तरीके से भारत में प्रवेश करने के मामले में झंझारपुर व्यवहार न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। एसडीजेएम आनंद राज की अदालत ने म्यांमार की एक महिला समेत चार आरोपियों को दोषी करार देते हुए तीन-तीन वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने सभी दोषियों पर 2-2 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना नहीं भरने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
यह फैसला बुधवार को सुनवाई पूरी होने के बाद सुनाया गया।
इंडो-नेपाल बॉर्डर पर पकड़े गए थे
मामला लौकहा थाना क्षेत्र के भारत-नेपाल सीमा पर स्थित पिलर संख्या 246 का है। अभियोजन के मुताबिक, 7 अक्टूबर 2023 को एसएसबी के सब इंस्पेक्टर करुणा दास ने म्यांमार की बेगम ताहिरा को चार बच्चों और तीन पुरुष साथियों के साथ भारत में प्रवेश करते हुए पकड़ा था।
इसके बाद लौकहा थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई और आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।
चार आरोपियों को कोर्ट ने माना दोषी
सजा पाने वालों में म्यांमार के बोतीदांग क्षेत्र के आईकर्प जिला निवासी जेबुल की पत्नी बेगम ताहिरा, सिमरी घनश्यामपुर निवासी मो. कादिर, बसौली घनश्यामपुर निवासी मो. फरमूद और मो. नियामत शामिल हैं।
अदालत ने चारों को तीन-तीन साल की सजा सुनाई है।
2023 से जेल में है विदेशी महिला
अभियोजन के अनुसार, म्यांमार की नागरिक बेगम ताहिरा 7 अक्टूबर 2023 से न्यायिक हिरासत में है। उसकी हिरासत अवधि को सजा में समायोजित किए जाने के बाद करीब 50 दिन की अवधि शेष रहने की बात बताई गई है। वहीं, अन्य तीन आरोपी फिलहाल जमानत पर हैं।
चार बच्चों के मामले में अलग प्रक्रिया
घटना के दौरान पकड़े गए चार बच्चों को सिवान स्थित बाल सुधार गृह भेजा गया था। बच्चों के मामले में बाद में पटना हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार अलग प्रक्रिया अपनाई गई।
अभियोजन पदाधिकारी भृगुनाथ राय के अनुसार, हाईकोर्ट के निर्देश पर चारों बच्चों के खिलाफ मामले को आगे नहीं बढ़ाने का आदेश दिया गया है। साथ ही म्यांमार की बेगम ताहिरा और चारों बच्चों को उनके देश वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया है।
भारत-नेपाल सीमा से जुड़े इस मामले में अदालत के फैसले के बाद अब विदेशी नागरिक की सजा पूरी होने और देश वापसी की प्रक्रिया पर भी प्रशासन की नजर रहेगी।
ये खबर भी पढ़े: Bihar: हाजीपुर हत्याकांड पर तेजस्वी का सरकार पर हमला, बोले- आठ दिन बाद भी सभी आरोपी बाहर क्यों?