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Bihar: भरत तिवारी की बहन से राखी बंधवाकर मनोज तिवारी ने दिया न्याय का भरोसा, भोजपुर में गरमाई ‘राखी पॉलिटिक्स’!

भोजपुर: भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी हत्याकांड के बाद अब इस मामले में राजनीति का एक नया रंग देखने को...

भोजपुर: भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी हत्याकांड के बाद अब इस मामले में राजनीति का एक नया रंग देखने को मिला है। बीजेपी सांसद और भोजपुरी अभिनेता मनोज तिवारी सोमवार को बिलौटी गांव पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। इस दौरान भरत तिवारी की बहन ने मनोज तिवारी को राखी बांधी। राखी बंधवाने के बाद सांसद ने परिवार को भरोसा दिलाया कि न्याय की लड़ाई में वह उनके साथ खड़े रहेंगे।

घटना ने सिर्फ भावनात्मक माहौल ही नहीं बनाया, बल्कि इसे लेकर ‘राखी पॉलिटिक्स’ की चर्चा भी शुरू हो गई है। वजह यह है कि रक्षाबंधन के प्रतीक के तौर पर हुई इस मुलाकात को सांसद ने सीधे न्याय की लड़ाई से जोड़ दिया और खुद को परिवार का सदस्य बताते हुए हरसंभव मदद का भरोसा दिया।

राखी के रिश्ते को न्याय की लड़ाई से जोड़ा

भरत तिवारी की बहन द्वारा मनोज तिवारी को राखी बांधना इस मुलाकात का सबसे भावुक हिस्सा रहा। सांसद ने कहा कि वह इस परिवार को अकेला नहीं छोड़ेंगे और दोषियों को कानून के तहत सजा दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे।

मनोज तिवारी ने परिवार की मांगों को गंभीरता से सुनने और उन्हें मुख्यमंत्री के सामने रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि घटना से हुए नुकसान की भरपाई संभव नहीं है, लेकिन परिवार को न्याय दिलाने के लिए सरकार और प्रशासन की ओर से कार्रवाई सुनिश्चित कराने का प्रयास जारी रहेगा।

‘भाई’ बने सांसद, क्या यह सिर्फ भावनात्मक रिश्ता है?

राजनीतिक नजरिए से देखें तो किसी जनप्रतिनिधि का पीड़ित परिवार के साथ इस तरह भावनात्मक रिश्ता जोड़ना सिर्फ व्यक्तिगत संवेदना तक सीमित नहीं रहता। खासकर तब, जब मामला पहले से ही राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय हो।

मनोज तिवारी ने राखी बंधवाने के बाद खुद को परिवार का सदस्य बताते हुए भरोसा दिया। इससे एक तरफ पीड़ित परिवार को भावनात्मक सहारा देने का संदेश गया, तो दूसरी तरफ बीजेपी की ओर से यह संकेत भी गया कि पार्टी इस मामले में परिवार के साथ खड़ी है।

यही वजह है कि इस मुलाकात को अब ‘राखी पॉलिटिक्स’ के एंगल से भी देखा जा रहा है।

ग्रामीणों के मुकदमों का मुद्दा भी उठा

मुलाकात के दौरान ग्रामीणों ने प्रदर्शन के बाद दर्ज मुकदमों का मुद्दा भी सांसद के सामने रखा। ग्रामीणों के मुताबिक करीब 14 लोगों के खिलाफ नामजद और लगभग 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

ग्रामीणों का कहना था कि प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई में निर्दोष लोगों को भी मुकदमे में शामिल किया गया है। इस पर मनोज तिवारी ने भरोसा दिलाया कि वह इस मुद्दे को मुख्यमंत्री के सामने रखेंगे और निर्दोष ग्रामीणों को राहत दिलाने की कोशिश करेंगे।

अधिकारियों पर कार्रवाई का भी किया जिक्र

सांसद ने कहा कि मामले में प्रथम दृष्टया जिन स्थानीय अधिकारियों की भूमिका सामने आई, उनके खिलाफ FIR, निलंबन और गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि कानून के मुताबिक जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

मनोज तिवारी ने यह भी कहा कि अगर किसी व्यक्ति के पास हथियार नहीं था और उसकी जान चली गई, तो यह गंभीर अन्याय का विषय है। ऐसे मामले में निष्पक्ष जांच और न्याय जरूरी है।

गांव में गुटबाजी से बचने की अपील

मनोज तिवारी ने गांव में कथित गुटबाजी को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने ग्रामीणों से आपसी भाईचारा बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि भरत तिवारी का उद्देश्य समाज और लोगों का कल्याण था, इसलिए उनके नाम पर गांव में किसी तरह का विवाद नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भरत तिवारी के परिवार को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा और न्याय की लड़ाई जारी रहेगी।

स्मारक की मांग पर भी सहमति

परिवार और ग्रामीणों की ओर से भरत तिवारी के नाम पर स्मारक बनाए जाने की मांग भी रखी गई। सांसद ने इस मांग पर सहमति जताई, लेकिन कहा कि फिलहाल सबसे पहली प्राथमिकता न्याय की लड़ाई है।

उन्होंने परिवार से कहा कि उनकी शिकायतें और सुझाव लिखित रूप में दिए जाएं, ताकि उन्हें संबंधित स्तर पर मजबूती से उठाया जा सके।

राखी की तस्वीर से बड़ा सियासी संदेश?

मनोज तिवारी और भरत तिवारी की बहन की राखी वाली तस्वीर अब इस पूरे घटनाक्रम का सबसे भावनात्मक प्रतीक बन गई है। एक ओर यह भाई-बहन के रिश्ते और पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना का संदेश देती है, वहीं राजनीतिक तौर पर यह बीजेपी के पीड़ित परिवार के साथ खड़े होने की तस्वीर भी पेश करती है।

हालांकि इसे सीधे तौर पर राजनीतिक रणनीति कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना जरूर है कि भरत तिवारी मामला अब सिर्फ कानून-व्यवस्था और न्याय की मांग तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि इसके साथ राजनीतिक बयानबाजी और जनभावना भी जुड़ती जा रही है।

राखी के बहाने मनोज तिवारी ने जहां परिवार को भावनात्मक भरोसा दिया, वहीं उनके इस दौरे ने बीजेपी को इस मामले में अपनी सक्रिय मौजूदगी दर्ज कराने का मौका भी दिया है। अब देखना होगा कि सरकार और प्रशासन की कार्रवाई आगे किस दिशा में जाती है और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के वादे कितनी तेजी से जमीन पर उतरते हैं।

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Mahuaa News

Author at mahuaanews.com
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