रांची। झारखंड में JPSC-JSSC प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर करीब 25 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन को सोमवार देर रात सरकार के बड़े फैसले से नया मोड़ मिल गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की विशेष बैठक के बाद JSSC CGL समेत TDPL एजेंसी द्वारा संचालित विवादित परीक्षाओं और उनके परिणामों को रद्द करने की घोषणा की गई। सरकार ने वर्ष 2014 से अब तक हुई प्रमुख नियुक्ति परीक्षाओं की जांच कराने का भी फैसला लिया है।
सरकार की घोषणा सामने आते ही रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थित धरना स्थल पर आंदोलनरत छात्रों में खुशी की लहर दौड़ गई। छात्रों ने इसे करीब 25 दिनों से जारी संघर्ष की बड़ी जीत बताया। कई जगह छात्रों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाया, मिठाइयां बांटी और ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया। अल्बर्ट एक्का चौक तक देर रात खुशी का माहौल देखने को मिला।
सरकार के फैसले पर छात्रों ने कहा- संघर्ष रंग लाया
धरना स्थल पर मौजूद छात्रों ने कहा कि लगातार कई दिनों तक शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन चलाने के बाद सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों पर गंभीरता दिखाई है। छात्रों के मुताबिक उनका मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और भर्ती व्यवस्था में सुधार था।
छात्रों का कहना था कि आंदोलन के दौरान कई कठिनाइयां आईं, लेकिन उन्होंने अपनी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखा। सरकार द्वारा परीक्षाएं रद्द करने और पुरानी नियुक्ति प्रक्रियाओं की जांच की घोषणा के बाद उन्हें उम्मीद है कि आगे होने वाली भर्ती परीक्षाएं अधिक पारदर्शी तरीके से कराई जाएंगी।
JPSC-JSSC न्याय मंच ने आंदोलन किया स्थगित
सरकार की घोषणा के बाद आंदोलनकारी संगठनों के बीच भी अलग-अलग रुख सामने आया। JPSC-JSSC न्याय मंच ने सरकार के फैसले को बड़ी उपलब्धि मानते हुए फिलहाल आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया।
न्याय मंच के नेता देवेंद्र नाथ महतो समेत अन्य अनशनकारियों का अनशन भी देर रात समाप्त कराया गया। इसके लिए स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी, मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और विधायक जय-राम महतो रांची सदर अस्पताल पहुंचे। ICU-HDU में इलाजरत अनशनकारियों को जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया गया।
लगातार कई दिनों से अनशन कर रहे देवेंद्र नाथ महतो और अन्य आंदोलनकारियों के लिए यह क्षण भावुक भी रहा। सरकार की घोषणा के बाद अस्पताल में मौजूद आंदोलनकारियों के बीच राहत और खुशी का माहौल दिखाई दिया।
हबीबा बोलीं- मां ने कहा था, लड़ाई जीतकर ही घर आना
लंबे समय से अनशन पर चल रही छात्र आंदोलनकारी हबीबा सरकार के फैसले की जानकारी मिलने के बाद भावुक हो गईं। रांची सदर अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने कहा कि उनकी मां ने उनसे कहा था कि इस लड़ाई को जीतकर ही घर लौटना।
हबीबा के मुताबिक सरकार द्वारा JPSC के साथ JSSC CGL को रद्द करने की घोषणा के बाद उन्हें लगा कि अब वह अपनी लड़ाई जीतकर घर लौटेंगी। उन्होंने इन आंसुओं को खुशी के आंसू बताया।
सोनम वांगचुक ने देवेंद्र नाथ महतो से वीडियो कॉल पर की बात
इसी बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो से वीडियो कॉल पर बातचीत की। उन्होंने छात्रों की मांगों पर सरकार द्वारा लिए गए फैसले के लिए सरकार को धन्यवाद दिया।
सोनम वांगचुक ने आंदोलन के दौरान देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व, संघर्ष और निष्ठा की सराहना की। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक छात्रों के मुद्दों को लेकर मजबूती से खड़े रहना आसान नहीं होता। उन्होंने देवेंद्र नाथ महतो के जज्बे और संघर्ष को सलाम किया।
रिफॉर्म्स मंच ने कहा- CBI जांच तक संघर्ष जारी रहेगा
हालांकि सरकार की घोषणा के बाद पूरा छात्र आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच ने सरकार के फैसले को महत्वपूर्ण लेकिन आंशिक जीत बताया है।
मंच का कहना है कि उसकी प्रमुख मांगों में मामले की CBI जांच भी शामिल है। जब तक CBI जांच की मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रखने की बात कही गई है।
रिफॉर्म्स मंच के प्रवक्ता रवींद्र पासवान के मुताबिक सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण मांगें मानी हैं, लेकिन अभी आंदोलन पूरी तरह खत्म करने का निर्णय नहीं लिया गया है। मंच अपनी आगे की रणनीति को लेकर विस्तृत घोषणा करेगा।
मंत्रियों ने अनशनकारियों से की मुलाकात
सरकार के फैसले के बाद मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी रांची सदर अस्पताल पहुंचे। दोनों मंत्रियों ने आंदोलनकारी छात्रों से मुलाकात की और उन्हें अनशन समाप्त करने के लिए समझाया।
मंत्रियों के साथ विधायक जय-राम महतो भी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अनशनकारियों को जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया। मंत्रियों ने कहा कि सरकार छात्रों की मांगों को लेकर संवेदनशील रही है और उनके हित में कैबिनेट की विशेष बैठक में महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं।
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने सरकार के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं के भविष्य से किसी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार ने JPSC-14, बैकलॉग 2023-2025, JSSC-CGL और TDPL द्वारा आयोजित विवादित परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया है।
CGL सफल कर्मियों में आक्रोश, बोले- भीड़तंत्र जीत गया
सरकार के फैसले का एक दूसरा पक्ष भी सामने आया। JSSC CGL परीक्षा पास कर सरकारी नौकरी हासिल कर चुके कर्मचारियों ने फैसले के खिलाफ विरोध जताया।
रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन के आसपास बड़ी संख्या में CGL सफल अभ्यर्थी और कर्मचारी जुट गए। उन्होंने मानव श्रृंखला बनाकर सरकार से अपना फैसला वापस लेने की अपील की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उन्होंने मेहनत और चयन प्रक्रिया के बाद नौकरी हासिल की है और अब परीक्षा रद्द होने से उनकी नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है।
कुछ प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि किसी अभ्यर्थी पर संदेह है तो उसकी उत्तरपुस्तिका या पूरी चयन प्रक्रिया की जांच की जाए। उन्होंने कहा कि सभी सफल अभ्यर्थियों को एक साथ दोषी मानना उचित नहीं है।
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सरकार ने आंदोलन के दबाव में फैसला लिया है। कुछ युवाओं ने नारे लगाते हुए कहा कि “भीड़तंत्र जीत गया और सिस्टम हार गया।” प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि उन्हें न्यायालय पर भरोसा है और वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी रास्ता अपनाएंगे।
प्रोजेक्ट भवन के बाहर तनाव, पुलिस की तैनाती बढ़ी
CGL सफल कर्मचारियों के विरोध को देखते हुए प्रोजेक्ट भवन और आसपास के इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौके की स्थिति पर नजर बनाए रहे।
मुख्यमंत्री का काफिला निकलने के दौरान कुछ कर्मचारियों ने मंत्रियों के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद कई प्रदर्शनकारी प्रोजेक्ट भवन के मुख्य गेट के पास बैठ गए। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी।
2014 से अब तक की भर्ती परीक्षाओं की होगी जांच
सरकार के फैसले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि वर्ष 2014 से अब तक आयोजित प्रमुख नियुक्ति परीक्षाओं की जांच कराने की घोषणा की गई है।
इसके साथ ही JPSC और JSSC की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए सुधार समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है। समिति का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाने के लिए आवश्यक सुधार सुझाना होगा।
सरकार के इस फैसले के बाद अब निगाहें जांच प्रक्रिया पर टिकी हैं। छात्रों की मांग है कि जांच निष्पक्ष तरीके से हो और यदि किसी स्तर पर अनियमितता या गड़बड़ी साबित होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
आंदोलन के भविष्य को लेकर तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं
सरकार की घोषणा के बाद छात्र आंदोलन में फिलहाल दो अलग-अलग रुख सामने आए हैं। एक तरफ JPSC-JSSC न्याय मंच ने सरकार के फैसले के बाद आंदोलन स्थगित कर दिया है और इसे बड़ी उपलब्धि माना है। दूसरी ओर रिफॉर्म्स मंच CBI जांच की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखने के पक्ष में है।
इस वजह से सरकार के फैसले के बाद आंदोलन पूरी तरह समाप्त होने के बजाय नए चरण में प्रवेश करता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि सरकार की ओर से जांच और सुधार की प्रक्रिया किस गति से आगे बढ़ती है और CBI जांच को लेकर सरकार का क्या रुख रहता है।
आंदोलन की जीत या नौकरी बचाने की लड़ाई?
झारखंड का यह पूरा घटनाक्रम अब दो पक्षों के बीच खड़ा दिखाई दे रहा है। आंदोलनरत छात्र सरकार के फैसले को अपने लंबे संघर्ष की जीत बता रहे हैं, जबकि CGL परीक्षा में सफल होकर नौकरी पा चुके कर्मचारी इसे अपने भविष्य और नौकरी के लिए बड़ा संकट मान रहे हैं।
एक ओर छात्रों को उम्मीद है कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जांच के बाद भर्ती प्रक्रिया पर उनका भरोसा मजबूत होगा। दूसरी ओर सफल कर्मियों का कहना है कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जाए, लेकिन पूरी परीक्षा और उससे जुड़े सभी सफल अभ्यर्थियों को प्रभावित करना उचित नहीं है।
फिलहाल सरकार के फैसले के बाद झारखंड की भर्ती परीक्षाओं को लेकर बहस और तेज हो गई है। अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि नई परीक्षाएं कब और किस प्रक्रिया के तहत होंगी, पुरानी नियुक्तियों का क्या होगा और 2014 से अब तक की जांच में क्या सामने आता है।
आने वाले दिनों में सरकार के अगले कदम, जांच की दिशा और छात्र संगठनों की रणनीति से इस पूरे मामले की तस्वीर और साफ होगी।
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